Wednesday, 22 October 2014

मैं छम्माछम नाचूँ गाऊँ kavita 216

मैं छम्माछम नाचूँ गाऊँ

मैं रानी महलों की रानी
तुम राजा जंगल के राजा
मैं महलों में राज करूँगी
तुम जंगल में काज करो।

मैं पहनूँ पाँवों में पायल
तुम पहनो हाथों में बेड़ी
मैं छम्माछम नाचूँ गाऊँ
तुम धम्माधम शोर करो।

मैं खुल्लमखुल्ला बोलूँ, हाँ
तुम सहमासहमी बोलो, ना
मेरे गीत रसीले सुर में
तुम बेसुरिया तान भरो।

मैं खुशियों के ढेर लगा दूँ
तुम खुशियों में आग लगा दो
मैं दूँ जीवनदान तुम्हें कि
तुम चुन-चुन कर वार करो।

मैं ना हारी किसी जंग में
तुमने कोई जंग न जीती
किसी चाह से पहले खुद को
अभिशापों से मुक्त करो.

मैं उड़ कर आकाश को छू लूँ
तुम सीमित धरती के वासी
सपनों में जीने से पहले
अपना बेड़ा पार करो।

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