Wednesday, 26 November 2014

6. एक भावचित्र : मित्रता

6. एक भावचित्र : मित्रता

मित्रता के लिए भी सक्षम, समर्थ और लायक होना पड़ता है.

मैं बहुत बुरी हूँ, फिर भी आप मुझसे मित्रता बनाए रखना चाहते हैं, मेरे मित्र बने रहना अफोर्ड करते हैं, इसमें मेरी कोई खासियत नहीं, खासियत आपकी है क्योंकि आप बुरों के साथ निभाने में सक्षम हैं.

मैं आपके लिए घातक हो सकती हूँ, यह जानते हुए भी आप मेरे मित्र बने रहना चाहते हैं, यानि आप घातक लोगों से अपना बचाव करने में समर्थ हैं.

मैं आपके लिए हर दृष्टिकोण से गलत हूँ, फिर भी आप मुझे सुधारना चाहते हैं, क्योंकि आप लोगों को अपने तरीकों में ढाल कर अपने साथ जोड़े रखने के इच्छुक हैं.

आप मुझे नाकाबिल समझते हैं, फिर भी मुझे छोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि आप मानते हैं कि जो एक बार आपके कबीले में आ गया, वह ताउम्र आपकी कैद में रहेगा। आप चाहे उसका खून पिएँ, वह उसे भी अपना अहोभाग्य समझेगा।

तो मित्रता के लिए मैं नहीं, आप सक्षम हैं, समर्थ हैं, काबिल हैं.

हरेक के बस की नहीं है दोस्ती। प्रेम से मुश्किल होती है दोस्ती। दोस्ती में भी वफ़ा और ईमानदारी की ज़रूरत होती है. दोस्ती के लिए पहले लायक बनना पड़ता है. कोई नालायक क्या दोस्ती करेगा?


No comments:

Post a Comment