Tuesday, 18 November 2014

एक पागल की कहानी

एक पागल की कहानी : जनहित में जारी
आधी हकीकत : आधा फ़साना

मैं काउंसलिंग करती हूँ और लोग मुझसे अपनी समस्याओं के निवारण हेतु संपर्क करते रहते हैं. (लेकिन मैं, जब तक बहुत ज़रूरी न हो, किसी से मिलना पसंद नहीं करती।) (And I charge too for my counselling. देखो जी, अब कोई मेरा दिमाग खाने से पहले मेरी फीस अग्रिम जमा करवाए।)

कुछ वर्ष पहले एक अकेली महिला, जो विधवा थी, एक बच्चे की माँ थी, पढ़ी-लिखी और उच्च नौकरी पर थी, पति बहुत पैसा छोड़ कर गया था, हाई स्टेटस था, ने मुझसे संपर्क किया कि मैं उसका दूसरा विवाह करवाने में उसकी मदद करूँ। असल में वह अपना वैवाहिक विज्ञापन मेरे ज़रिये देना चाहती थी. मैंने अपनी ईमेल आई डी के साथ उसका विज्ञापन दे दिया। बहुत प्रतिक्रियाएँ आईं. एक मेल अजीब था. बहुत गरिष्ठ अंग्रेजी में एक व्यक्ति ने लिखा था कुछ इस प्रकार।।।।।

"मैडम, मैं अपने एक मित्र की ओर से आपको लिख रहा हूँ. मेरा मित्र इंजिनियर है, अच्छी नौकरी में है, तलाकशुदा है, कोई ज़िम्मेदारी नहीं है, अमीर परिवार से है, बस एक बात यह है कि वह कुछ साल पहले पागलखाने में रहा है, वह पागल नहीं था, उसकी पत्नी के घरवालों ने उसे झूठा पागल साबित करके पागलखाने भिजवा दिया था। पागलखाने के प्रमाणपत्र के अनुसार वह मानसिक रूप से एकदम स्वस्थ है. मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूँ कि क्या मेरे मित्र की परिस्थिति में उसके विवाह की सम्भावना हो सकती है? क्या आप अपने लिए उस पर विचार कर सकती हैं?"

मेरे नाम की आई डी होने के कारण वह मुझे ही संभावित कन्या समझ रहा था. खैर, इसकी तो कोई बात नहीं पर मुझे अजीब इस बात का लगा कि हिम्मत तो देखो इस पागल की, इतने आलीशान विवरण वाली महिला के लिए विवाह का प्रस्ताव रख रहा है. मैंने कोई उत्तर नहीं दिया। एक महीने बाद जब सारी मेल छानबीन के बाद रिजेक्ट हो गईं और मुझे थोड़ा समय मिला तो मैंने सोचा, इस आदमी को डाँटा जाए कि तेरी हिम्मत कैसे हुई लिखने की? मैंने उसे अंग्रेजी में लिखा।।।।।।

"महोदय, वह विज्ञापन मेरे लिए नहीं था, किसी परिचित के लिए था. आय'म अ सीनियर पर्सन। बहरहाल, मैं आपकी हिम्मत की दाद देती हूँ जो आप एक पागल का प्रस्ताव लेकर आए."

बन्दे ने तुरंत जवाब दिया, "मैडम, क्षमा चाहता हूँ. क्या आपकी कोई मैट्रीमोनियल एजेंसी है?"

मैंने लिखा, "महोदय, मैट्रीमोनियल एजेंसी होती तो आपसे पचास हज़ार रुपये लिए बिना बात नहीं करती, क्योंकि आपका केस बहुत बिगड़ा हुआ है."

उसने फिर से क्षमा माँगी और लिखा, "मैडम, बड़ी बहन होने के नाते आप मेरे मित्र की मदद करें। वह एक अच्छा, भलामानस, बुद्धिमान व्यक्ति है. बस किस्मत का मारा है."

लो जी, मैंने सोचा, मदद कर देते हैं.

धीरे-धीरे बातचीत में वह खुलता गया और एक दिन उसने यह रहस्योद्घाटन किया कि वह 'मित्र' नहीं, वही 'वह' है. उसने अपना छायाचित्र भेजा। आकर्षक व्यक्तित्व था. उम्र लगभग पैंतालीस वर्ष। उसने अपनी कहानी सुनाई कि वह इलाज के लिए एक पागलखाने में भर्ती हुआ था, सब उसके ससुरालियों का किया-धरा था. वह ठीक हो गया लेकिन उसके घर का कोई भी सदस्य उसे वापस घर ले जाना नहीं चाहता था और वह इस स्थिति में नहीं था कि अकेले कहीं मकान आदि खोज कर रह सके. उसकी खुशकिस्मती यह हुई कि शिक्षित होने के कारण उसे पागलखाने के कार्यालय में ही नौकरी दे दी गई (प्रशासन में कम्प्यूटर पर काम करता है), तथा वहीँ रहने के लिए एक कमरा मिल गया. उसकी इच्छा थी कि हर हाल में उसकी शादी हो, उसके बच्चे हों. एक आम आदमी की ख्वाहिश। मेरे पास उसकी बताई बातों को सच समझने के अलावा न कोई साधन था, न कोई ज़रूरत। उसने कंप्यूटर पर स्काइप में मुझसे बात करके मुझे खुद को दिखाया और अपना कार्यालय का कमरा दिखाया। बस.

मुझे उससे हमदर्दी हुई. मैं भी गज़ब हूँ. मुझे हर ऐसे-वैसे से, हर ऐरे-गैरे से हमदर्दी हो जाती है, सिवाए भिखमंगों के।

मैंने अपने परिचय की कई ऐसी महिलाओं को, जिन्हें जीवन साथी की तलाश थी, उसके बारे में बताया। सबने एक सुर में उसे रिजेक्ट कर दिया, साथ ही मुझे उलाहना भी दिया, "मणिका, हमीं रह गए थे क्या इस पागल के लिए?" या "मणिका जी, क्या यह पागल ही रह गया था हमारे लिए?"

उसने शादी डॉट कॉम में रजिस्टर कराया और मुझसे चाहा कि मैं उसकी मदद करूँ लेकिन मेरे बस का नहीं था. मैंने मना कर दिया। मैंने उसे समझाया, हर आदमी को सब कुछ नहीं मिलता, हर आदमी की शादी नहीं होती, इस दुनिया में बहुत लोग अकेले जीते हैं, अकेले मरते हैं. लेकिन उसका प्रयास जारी है.

मुझे उसकी बातों से अंदाज़ा हुआ है कि उसमें अभी भी पागलपन के कुछ तत्व हैं. मसलन, वह सिर्फ अपने बारे में बात करता है, दुनिया, समाज, इधर-उधर की कोई बात नहीं। उसके मन में हर वक़्त एक डर रहता है कि दूसरे उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं. उसे पागलखाने के दूसरे पागलों से डर रहता है कि वे उसे मार सकते हैं क्योंकि पागलखाने ने उसे नौकरी दी. उसे लगता है कि वह इस दुनिया में एकमात्र बुद्धिमान व्यक्ति है और कोई बुद्धिमत्ता में उसके आगे टिक नहीं सकता। उसे यह भी अभिमान है कि वह एक अत्यन्त सुन्दर और आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक है और कोई भी लड़की उस पर आसानी से फ़िदा हो सकती है. उसे यह डर रहता है कि किसी को उसके अतीत में पागल होने का पता न चल जाए. वह सोचता है कि जिससे उसकी शादी तय हो जाए, उसे ही वह अपनी असलियत बताए (और चाहे न भी बताए). अपने डर के कारण वह अपने पासवर्ड हर हफ्ते बदलता है. उसे जीवन साथी के रूप में जो लड़की यानि महिला चाहिए, वह एकदम गोरी और खूबसूरत होनी चाहिए, जिसकी उम्र 25 से 39 वर्ष के बीच हो. वैवाहिक स्तर कोई भी हो, एक-दो बच्चा हो, गरीब हो, गाँव की हो, कोई बात नहीं। (गज़ब है, ऐसों-ऐसों के भी नखरे तो देखो।)

मैं खासकर महिलाओं के हित में बता रही हूँ कि उसने अपनी कई मेल आई डी बनाई हुई हैं और कई फेसबुक अकाउंट खोले हुए हैं, अलग-अलग नामों से (A, D, K, M, R से शुरू होने वाले नामों के बारे में तो मुझे पता है). वह सिर्फ और सिर्फ महिलाओं से बात करता है, नेट से खोजता है, बात करने की कोई न कोई वजह बना लेता है. फेसबुक पर किसी विशिष्ट के बारे में लिखेगा तो वह भी किसी विशिष्ट महिला के बारे में, चाहे वह राजनीति से जुडी हो या खेलों से या साहित्य से या धर्म से. वह दोस्ती करता है तो केवल 25 से 39 वर्ष के बीच की महिलाओं से, इस उम्मीद में कि शायद कोई पट जाए. वह शालीन तरीके से बात करता है. उसके बात करने से उसके अतीत का अंदाज़ा नहीं होता। ठीक है, जीवन जीने, घर बसाने का हक़ हरेक को है, लेकिन अलग-अलग नामों से आई डी बना कर झूठ से, छल से किसी को फँसाना सही नहीं।

हाँ जी, वह मुझसे डरता है कि उसके द्वारा सारे भेद खोल देने के बावजूद मैं उसके लिए कुछ नहीं कर पाई. पर मुझसे किसी को डरने की ज़रुरत नहीं क्योंकि मैं किसी का बुरा नहीं करती।

और हाँ, किसी महिला को उस जैसे व्यक्ति का संदेह हो तो वह अधिक जानकारी के लिए मुझसे संपर्क कर सकती है. सबका मंगल हो.

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