Friday, 7 November 2014

इतराना क्या? Kavita 220

इतराना क्या?

अनगिन इच्छाओं का क्या?
इतने अरमानों का क्या?
आज जले, कल राख.

यौवन की स्थिरता क्या?
ऊपर की सुंदरता क्या?
आज मोल, कल ख़ाक.

प्रेम के आडम्बर का क्या?
बेमन के रिश्तों का क्या?
आज फूल, कल ढाक.

सच्चे को झुठलाना क्या?
कर्मों पर इतराना क्या?
आज बोए, कल चाख.

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