Wednesday, 19 November 2014

आज की प्रार्थना Kavita 222

आज की प्रार्थना

वाह प्रभु ! तेरी माया
कैसा-कैसा गुल खिलाया।

प्रकृति को सुन्दरता दी
इंसान अजीब बनाया।

कोई विश्वास नहीं उनका
काला मन, गोरी काया।

विषयों की भरमार दी
पर रूप सँवर नहीं पाया।

सच है तेरी व्याख्या
कहीं धूप, कहीं छाया।

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