Tuesday, 2 December 2014

10. एक भावचित्र : माँ

10. एक भावचित्र : माँ

माँ, तू उदास मत हो. तेरे अपने बच्चों ने तुझे तेरा देय नहीं दिया, कोई बात नहीं। चारों तरफ देख, बच्चे ही बच्चे हैं. अनेक बच्चे, जिनके माँ-पिता ने उनका देय नहीं दिया। कहीं का बदला कहीं निकलता है. सारी दुनिया एक है, यह विश्व एक कुटुंब के समान है, वसुधैव कुटुम्बकम। कई बार करता कोई और है, भोगता कोई और है. सब भोगने वाले एक हो जाएँगे तो सब करने वालों को निष्क्रिय कर देंगे। माँ, देख, कितने बच्चे एक गोद के लिए तरस रहे हैं, आ और उन्हें अपना, खुद भी पूर्ण हो और उन्हें भी पूर्ण कर.


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