Monday, 15 December 2014

आलोक मिश्र

आलोक मिश्र

फेसबुक से मुझे एक मित्र मिला, आलोक मिश्र। मुझसे लगभग आधी उम्र का है लेकिन उसका मुझसे बातों में इतना दिल मिलता है कि पूरा दिन बतियाता रहे तो न ऊबे, यह उसी ने मुझे बताया। (मैं इतनी बातें किसी से नहीं कर सकती, बीच-बीच में विरक्ति आ घेरती है और बाद में अफ़सोस करती हूँ कि मैं क्यों इतना बोली?) कहता है, उसे दो मित्र बहुत पसंद हैं, "मैम आप और ध्रुव गुप्त सर." वह दो बार मेरे घर ध्रुव गुप्त सर के साथ ही आया और बाद में कुछेक बार अकेला। व्हाट्सऐप पर बहुत बातें करता है. उर्दू शायरी का शौक़ीन है, अपने लिखे और दूसरों के लिखे शेर सुनाता है, बहुत भावुक है, कहीं जैसे डूबा रहता है. अपने परिवार के किस्से सुनाता है, जिनमे से कुछ पर कहानी लिखने का मैंने उससे वादा किया है. कोई एक लड़की कभी अच्छी लगी थी, उसका दुःख भी गाता है. अस्थायी रूप से दिल्ली में कहीं रहता है. आजकल अपना फेसबुक अकाउंट बंद किए हुए है, कहता है, हर तरफ से मन ऊब गया. असल में जब स्वास्थ्य ठीक न हो तो कहाँ कैसे मन लगे?

आलोक कई महीनों से बहुत बीमार चल रहा है, अपने गाँव में इलाज के लिए गया हुआ है. फोन पर और व्हाट्सऐप पर नियमित सम्पर्क बनाए हुए है. उसकी बातचीत में हर बार ध्रुव जी का ज़िक्र भी ज़रूर होता है, जैसे मेरी, उसकी और ध्रुव जी की एक टीम हो.

"ध्रुव सर कैसे हैं? आपकी कभी बात हुई?"

मैं उसे हर बार बताती हूँ, "आलोक, मेरी और ध्रुव जी की कभी बात नहीं होती। बस, एक बार ध्रुव जी ने तुम्हारा हाल पूछा था."

मुद्दे की बात यह कि इन दिनों वह बहुत बीमार है. एक बार बोला, "मैम, मैं बचूँगा नहीं।"

मैंने कहा, "आलोक, जब मैं कैंसर से बच गई, तो तुम इस छोटी-मोटी बीमारी से क्यों नहीं बचोगे? चिन्ता न करो."

(मैंने आज उससे कहा है, अपना फेसबुक खोल लो। शायद खोल ले. आज बताया, उसका स्वास्थ्य बेहतर है.)

बोला, "एक ज्योतिषी ने बताया है कि 2018 में मेरी मृत्यु होगी। वैसे मैं ज्योतिषियों पर ज़्यादा विश्वास नहीं करता।"

"अरे, अभी चार साल पड़े हैं, यह चार साल मज़े में जिओ. मुझे भी ज्योतिषी ने बताया है कि मेरी मृत्यु 2017 में होगी।" मैंने कहा.

तपाक से बोला, "मैम, बस आप अपनी मृत्यु को एक साल और रोक लेना, फिर 2018 में हम दोनों साथ मरेंगे।"

हे भगवान ! मेरा इतना दुलार करने वाला बच्चा-दोस्त मुझे फेसबुक से मिला।

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