Sunday, 11 January 2015

17. एक भावचित्र : चिन्ता चिता समान

17. एक भावचित्र : चिन्ता चिता समान

मैं कोई भी काम करने से पहले बहुत ज़्यादा सोच-विचार नहीं करती, बस चट मँगनी, पट ब्याह की तरह निर्णय करती हूँ और हमेशा सफल रहती हूँ. चाहे बने-बनाए सिस्टम से निकल कर बाहर देश / विदेश में नौकरी करना हो, मकान / दुकान खरीदना हो, पुत्र का विवाह करना हो, मेरे सारे ही फैसले चट-पट लिए गए और बेहद सफल रहे. बहुत ज़्यादा सोच-विचार करके कोई काम करो और उसमें सफलता न मिले तो कितना दुःख हो ? इसलिए, जो होगा, देखा जाएगा, की तर्ज़ पर मैं सारे काम करती हूँ. काम होने से पहले चिन्ता करो, फिर काम सफल न हो तो चिन्ता करो, ऐसे तो सारी उम्र चिन्ता करने में ही गुज़र जाएगी। और सुना है ना, चिन्ता चिता समान। जीते जी चिन्ता की चिता में क्यों जलना है ? इसलिए मस्त रहो प्यारे, आत्मविश्वास अगर साथ है तो कोई फिर हिम्मत क्यों हारे ? चिन्ता-मग्न हो कर सोचना बंद करो और जो करना है, कर डालो। अंत में कहते हैं ना, भगवान भली करेंगे ?


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