Sunday, 4 January 2015

पर्दाफ़ाश 2 : Viren Kumar

पर्दाफ़ाश 2 : Viren Kumar

ओए, तू कहीं का राजा-महाराजा सै क्या, जो बड़े भाई के जाने के बाद भी अपनी फेसबुक की दुकान यूँ खुलेआम सजाए बैठा है? तन्नै किसी का डर को नी ? काम चोर-लुटेरों वाले, किस्मत का ताला जेल में बंद, और चला है दुनिया में मुँह उठा कर गुरूर से जीने ? बंद कर बावले, वरना पुलिस आई तेरे पीछे। सिर्फ उसे अलाउड है जो लेखक बन कर दिखाए। समझा कुछ ?

THIS POST IS NOT ABOUT MY DEAR FRIEND.

(यह फोटो गूगल से उठाई हुई है, इसका किसी की प्रोफाइल पिक्चर होना, यदि हुई तो, एक संयोग है. फोटो एक अति सुन्दर बच्चे की है. क्या यह बच्चा बड़ा होकर एक शातिर-दिमाग अपराधी बन सकता है? क्यों नहीं बन सकता? आखिर अपराधी भी कभी बच्चे थे.)


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