Wednesday, 7 January 2015

पर्दाफ़ाश 5 : अखिलेश तिवारी

पर्दाफ़ाश 5 : अखिलेश तिवारी

यहाँ एक हैं श्री अखिलेश तिवारी। देश के चिन्तकों के स्वयंभू निर्णायक। उन्होंने फेसबुक पर देश की चिन्ता करने वालों की तलाश की और उसमे मुझ अकिंचन समेत दस-बारह लोगों के बारे में अच्छी-अच्छी बातें लिख कर पोस्ट कीं. उनकी कृपा सर-माथे पर. (लेकिन मैंने उनकी हर पोस्ट में टैग किया जाना पसंद नहीं किया। साथ ही, विरोध का एकाध मुद्दा और उठा, जिसके लिए इन्होने मुझसे कहा कि ये तो मेरे लिए इतना कर रहे हैं और मैं इनका विरोध कर रही हूँ. तो जी, मैं एक तारीफ़ भरे लेख के आगे बिकी नहीं थी.) अब उन्होंने उस लिस्ट में से कुछ नाम हटा कर एक नई लिस्ट जारी की कि पहले उनसे गलत चुनाव हो गया था. यह भी सही है, आखिर इंसान गलतियों का पुतला है, गलती हो ही जाती है, सुधार लिया, बेहतर किया। लेकिन आदयणीय महोदय, आप एक-पक्षीय, एक व्यक्तीय संस्था में कैसे परिवर्तित हो गए? आप अकेले इस बात का चयन करने वाले कौन कि कौन देश के लिए चिन्ता कर रहा है, कौन नहीं? यह एक-व्यक्ति-महारथी होने की पहल है, यह सब धीरे-धीरे एक व्यक्ति के संस्था में बदल जाने की शुरुआत है, ताकि जैसे ही पाँव मज़बूत हुए, इसे अर्थोपार्जन का साधन बनाया जा सके. मैं इसका सिरे से विरोध करती हूँ. मैं क्या, आप सब भी करेंगे। अरे, कोई तुक भी हो, या बेतुकी चाल चल के मित्रों को खुश करेंगे?

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