Saturday, 17 January 2015

यशोदा बेन

यशोदा बेन

बहुत लोग कहते हैं, यशोदा बेन का चरित्र अद्वितीय है. मैं जानना चाहती हूँ कि उनका चरित्र किस तरह अद्वितीय है? क्या आज पता चला कि वे प्रधानमंत्री की पत्नी हैं, इसलिए अद्वितीय हो गईं? हाँ. वैसे अद्वितीय होने का एक कारण तो यह हो सकता है क्योंकि अन्य कोई भी स्त्री प्रधानमन्त्री की पत्नी होने का दावा नहीं कर रही. क्या आप यह कहना चाहते हैं कि वह अद्वितीय इसलिए हैं कि उन्होंने पति के होते हुए, पति के बिना अकेले अपना जीवन बिताया? इसमें क्या ख़ास बात है? बहुत सी स्त्रियाँ बिताती हैं. इस दुनिया में हर स्त्री को पति राशन कार्ड की तरह नसीब नहीं होता। (न ही हर पुरुष को पत्नी।) उन्होंने अपने आप में ऐसा क्या काम किया जो उन्हें अद्वितीय कहा जाए? वह अध्यापिका की नौकरी करती हैं, उन्होंने इस क्षेत्र में ही कौन सा झंडा गाड़ा? कौन सा ऐसा लीक से हट कर काम किया जो उन्हें इस 'दूसरा न कोई' के दर्जे पर बैठाया जाए? सीधी-सादी शरीफ महिला हैं, अपनी रोटी खुद कमा के खा रही हैं, जैसा इस देश की हज़ारों-हज़ार महिलाएँ करती हैं. बल्कि देश की हज़ारों-हज़ार महिलाओं को पति द्वारा छोड़े गए बच्चे भी पालने पड़ते हैं. उनके साथ हमदर्दी का कारण समझ में नहीं आया. मैं उनका आदर कर सकती हूँ लेकिन उन्हें व्यर्थ ही महान आत्मा बनाने का कष्ट मैं नहीं उठाऊँगी।  मैं भी एक औरत हूँ. मैंने भी बहुत बदहाली में दिन गुज़ारे हैं. लेकिन कोई मुझ पर तरस खाए, मुझे 'बेचारी' कहे, मुझे मंज़ूर नहीं।

(मुझे पता है, मेरी इस पोस्ट पर मित्र बहुत उखाड़-पछाड़ करने वाले हैं, पर क्या करूँ, आज भावों का दरिया रुक ही नहीं रहा है.)


No comments:

Post a Comment