Tuesday, 3 February 2015

मुझे मरने का बड़ा शौक है

मुझे मरने का बड़ा शौक है

मित्रों, मुझे मरने का बड़ा शौक है. मैं जब से पैदा हुई हूँ, तब से ही मरना चाह रही हूँ लेकिन मुझे मरना नहीं आता, नहीं पता कि कैसे मरा जाता है? बस मर-मर कर जीना आता है, सो जी रही हूँ, और बड़े ठाठ से जी रही हूँ.

बहुत साल पहले, जब मेरा पुत्र छोटा-सा था तो मैं हर वक़्त सोचा करती थी कि यदि मैं मर गई तो इसका क्या होगा? मैं अपने सारे दोस्त-सहेलियों-सम्बन्धियों से कहती, 'अगर मुझे कुछ हो जाए तो तुम इसे सँभाल लोगे?' वे जवाब देते, 'नहीं, नहीं, ऐसा नहीं बोलते, तुम क्यों मरोगी? तुम बहुत साल जिओगी।' उनके तसल्ली देने के बाद भी मेरा उनसे बार-बार यही कहती रही. मैं बार-बार यह पूछती कि अगर मैं मर गई तो? वे बार-बार मुझे समझाते कि ऐसा नहीं बोलते। मेरा कहना बंद नहीं हुआ. आखिर एक दिन वे सब एक सुर में झल्ला उठे, 'यार, तू मर भी. हम तेरे बेटे को सँभाल लेंगे, चिन्ता मत कर.' (निकृष्ट कहीं के, मेरा मरना चाह रहे हैं?)

मेरा पुत्र उस समय बहुत छोटा था, इतना कि मैं घुटनों के बल बैठती तो वह खड़ा हो कर मेरे बराबर आता था और जब मैं खड़ी होती, तब वह पलंग पर खड़ा हो कर मेरे बराबर आता था. मैं उससे भी हर समय एक ही बात, 'बेटा, अगर मुझे कुछ हो गया तो तू अपने को सँभाल लेगा ना? तू मेरे बिना जी लेगा ना?' नन्हा बच्चा नेरे आँसू पोंछता हुआ कहता, 'नहीं मम्मी, आप नहीं मरेंगी।' मेरा उसके आगे भी यह मृत्यु-आलाप बंद नहीं हुआ तो एक दिन वह बच्चा बोला, 'हाँ मम्मी, जी लूँगा।' (निकम्मा कहीं का, मम्मी के बिना जी लेगा?)

बीस-पच्चीस साल पहले की बात है. मैं कहीं जा रही थी. एक बाबा साधू सामने से आए, बोले, 'बच्ची, दस साल और जी ले, फिर चलाचली का मामला है.' मैंने सोचा, बहुत होते हैं, दस साल, फिर भी इंतज़ाम करके रख लूँ. मैंने अपनी एक बड़ी सी फोटो खिंचवाई, बेटे ने पूछा, 'क्यों?' मैंने कहा, 'बाद में फोटो रख कर पूजा की जाती है, तू कहाँ फोटो बड़ी करवाने के लिए भागा-दौड़ी करेगा?' (पर अच्छा है, मैं तब नहीं मरी क्योंकि आज आप मित्र और एकाध बड़ी विचित्र प्रकृति के लोग जो मेरे जीवन में आए, उनके अनुभव से वंचित रह जाती। अब सोचिए, वंचित रह भी जाती तो कौन सा पहाड़ टूट जाता? आखिर मर कर तो सब ख़त्म ही हो जाना है.)

अब मैं घर में काफी कैश रखती हूँ. (कहीं चोर न सुन लें) बेटे ने कहा, 'घर में इतना कैश रखने से क्या फायदा? यह तो चोरों को निमंत्रण देना हुआ. बैंक में रहेगा तो ब्याज भी मिलता रहेगा।' मैंने उसे समझाया, 'नहीं बेटा, कल को मुझे कुछ हो गया तो क्या तू पैसा निकालने तुरंत ATM जाएगा?' मेरा जवाब सुन कर बेटा क्या कहता? 'क्या माँ, आप भी……?'

एक दिन मेरे किशोर पौत्र ने जब यह सुना तो बोला, 'नहीं अम्मा, आप नहीं मरेंगी, मैं आपको मरने ही नहीं दूँगा,' और मुझसे लिपट कर धाड़-धाड़ रोना शुरू कर दिया। मैं बोली, 'पगले, अपने मरने की बात करते रहो तो उम्र बढ़ती है.' लेकिन उसका रोना नहीं थमा, जब तक उसने मुझसे यह प्रॉमिस नहीं लिया कि अब मैं कभी ऐसी बातें नहीं करूँगी। (देखा ना? सबसे गहरा रिश्ता।)

अपनी वो फोटो यहाँ दे रही हूँ. (क्या अपने मरने की बात से मैं दुखी थी जो इतनी उदास फोटो आई है?)


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