Saturday, 7 February 2015

कामयाबी के अनमोल रहस्य (भगवंत अनमोल)

कामयाबी के अनमोल रहस्य (भगवंत अनमोल)

भगवंत अनमोल की नई और तीसरी पुस्तक "कामयाबी के अनमोल रहस्य" पढ़ी. पढ़ते-पढ़ते कई जगह लगा कि क्या अनमोल की उम्र सचमुच केवल 24 साल है? ऐसी पुस्तकेँ प्रायः बड़ी उम्र के देशी-विदेशी लेखकों ने लिखी हैं. कोई वरिष्ठ लेखक ही इस प्रकार की पुस्तक लिखने का साहस करेगा ताकि उनके जीवन के अनुभवों का निचोड़ उनकी लेखनी में आ सके. लेकिन अनमोल ने 24 वर्ष की उम्र में यह साहस, जिसे मैं दुस्साहस कहूँगी, किया है तो यह श्लाघनीय है.

जैसा कि मैं इस पुस्तक के नाम से अनुमान लगा रही थी कि इसमें सूक्तियाँ, कहावतें, महापुरुषों के प्रेरणादायी वचन आदि दिए गए होंगे, लेकिन नहीं, इस पुस्तक का ढाँचा कहानी और उपन्यास का ढाँचा है, सूक्तियाँ भी हैं लेकिन उन्हें कथा में पिरो कर पेश किया गया है. कोई उपदेश ऐसे ही दे दो तो उसका उतना प्रभाव नहीं पड़ता, जितना उस समय पड़ता है, जब उसे तर्क सहित, उदाहरण सहित समझा कर बताया जाए. वही इस पुस्तक में किया गया है. इस पुस्तक को पढ़ते हुए मुझे Paulo Coelho की विश्व विख्यात रचना ALCHEMIST याद आई.

अनमोल एक अत्यंत महत्वाकांक्षी युवा लेखक हैं, इतने महत्वाकांक्षी कि उन्हें अर्जुन की भाँति मछली की केवल आँख नज़र आती है. अच्छा है, अपने लक्ष्य पर स्वयं को केंद्रित करना चाहिए लेकिन यह केंद्रीकरण इतना भी ज़्यादा न हो कि आप समाज से विकेन्द्रित हो जाएँ। अनमोल जल्दी से जल्दी साहित्य के क्षेत्र में "बड़ा आदमी" बनाना चाहते हैं, नाम कमाना चाहते हैं, यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है, न ही ऐतराज़ योग्य कोई बात है. लेकिन यह ध्यान रहे कि जब आप पब्लिक फिगर बन जाते हैं तो आपको पब्लिक के कटाक्षों का भी सामना करना पड़ता है. जब अनमोल कामयाबी के अनमोल रहस्य के बारे में जानते हैं, तो उन्हें अपने लिए भी एक आचार-संहिता तैयार करनी होगी। वे Megalomania से ग्रस्त हैं, यानि अपने को महान समझने की भावना से, जो एक तरह से हीन भावना का ही रूप है. Megalomania is a psychopathological condition, characterized by delusional fantasies of power, relevance, omnipotence, and by inflated self-esteem. अब वे अपनी पुस्तकों का प्रचार बंद करें। इस पुस्तक का नाम ऐसा है कि इसे नेट पर देख कर पाठक स्वयं खरीदेंगे।

अंत में इस पुस्तक से ही एक ब्रह्म वाक्य ---
सफलता की सबसे ऊपरी मंज़िल तक जाने के लिए कोई लिफ्ट नहीं है, वहाँ तो सीढ़ियों से ही जाना पड़ता है.


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