Thursday, 26 March 2015

कि तुम आना Kavita 229

कि तुम आना

कि तुम आना
इस सूखी धरा पर
नमी सा बिछ जाना।

कि तुम आना
लिखे जो गीत तुम्हारे लिए
उन्हें गुनगुनाना।

कि तुम आना
बुझती हुई चिंगारी को
हवा दे जाना।

कि तुम आना
मौत के साये में झूलते मन को
निर्भय बनाना।

कि तुम आना
मेरी सारी मूर्खताओं पर
फिर से मुस्कुराना।

कि तुम आना
मुर्दा पड़ी कल्पनाओं को
पंख लगा जाना।

कि तुम आना
अगले जन्म में मिलने का वादा करके
वापस लौट जाना।

कि तुम आना
एक बार तो आना
ज़रूर आना।

कि तुम आना......

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