Tuesday, 3 March 2015

My Father : Shri Ram Nath Chopra ji

My Father : Shri Ram Nath Chopra ji

कुछ विषय ऐसे होते हैं, जिनके बारे में जिज्ञासा कभी धुँधली नहीं पड़ती। जितना जानते जाओ, उससे ज़्यादा जानने के लिए बचा रह जाता है. जैसे एक विषय है भूत. क्या मरने के बाद इंसान भूत बन जाता है? कहते हैं, अतृप्त आत्माएँ भूत बन जाती हैं. या मरने के बाद कुछ समय तक मरने वाले की आत्मा उसी जगह टहलती रहती है? मेरे पिताश्री अपने अंतिम दिनों में कई बार मेरे घर आकर महीनों रहे. हम उन्हें बाऊजी कहते थे. बाऊजी ने मेरे इस नॉएडा वाले घर में अंतिम साँस ली. उनका कमरा पहली मंज़िल पर था. मेरा कमरा भी पहली मंज़िल पर था. (अब मेरा वही कमरा है जिसमे वे रहते थे.) उनकी मृत्यु के एक सप्ताह बाद बरखा को नीचे अपने कमरे में महसूस हुआ कि बाऊजी उसके ऊपर वाले कमरे में चल रहे हैं. उसे एक पल के लिए भी यह नहीं लगा कि बाऊजी अब नहीं रहे. बरखा ने ही बताया कि मरने के बाद आत्मा कुछ दिन तक उसी घर में घूमती है. बहुत दिनों तक मुझे भी लगता रहा कि बाऊजी मेरे पलँग के चारों ओर चल रहे हैं. क्या यह सिर्फ ख्याल था? या सच में उनकी आत्मा टहल रही थी?

उनका अगले जन्म में विश्वास था और वे यह मानते थे कि किसी की मृत्यु के तुरंत बाद यदि परिवार की कोई स्त्री गर्भ धारण करती है तो मरने वाले की आत्मा उस गर्भ में आ जाती है और मरने वाले का पुनर्जन्म उस गर्भ के बच्चे के रूप में होता है. वे मेरे घर में पुनर्जन्म लेना चाहते थे और कहा करते थे कि देखना, मैं मरने के बाद बॉबी का बेटा बन कर जन्म लूँगा। उनके जीवित रहते जब बरखा गर्भवती हुई तो उनके चेहरे पर मैंने ख़ुशी से ज़्यादा मलाल देखा, जैसे अफ़सोस कर रहे हों कि वे बॉबी का बेटा बनने से रह गए. अगले जन्म में इतना अटूट विश्वास? कहते हैं, बेटियाँ अपने माता-पिता का श्राद्ध नहीं करतीं, पर मैं उनका श्राद्ध करती हूँ. (मेरा भाई तो करता ही है, श्राद्ध के दिनों में.) मैं उनके मृत्यु दिवस पर अपने हिसाब से उनका श्राद्ध करती हूँ. आज यूँ ही उनकी फोटो देख कर मन हुआ यह लिखने के लिए.

बाऊजी, अंतिम दिनों में.


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