Saturday, 7 March 2015

Women's day special : 2

Women's day special : 2

यह महिला दिवस उन औरतों के नाम, जो औरत होने के बावजूद पूर्ण औरत होने के लिए तरस रही हैं. यह उन औरतों के दर्द की कहानी है, जो पुरुष-शरीर में कैद हैं, यानि Transgender हैं यानि जिन्हें आम भाषा में हिजड़ा कहते हैं. ऐसी ही एक औरत की डायरी के कुछ पन्ने.

जैसे कि एक पुरुष को मर्द कहते हैं, एक स्त्री को औरत कहते हैं, वैसे ही हम जैसों को हिजड़ा कहते हैं. मुझे पसंद नहीं कि मुझे हिजड़ा या Transgender कहा जाए. मेरा जन्म एक लड़के के रूप में ज़रूर हुआ लेकिन मैं लड़का नहीं हूँ, मैं एक लड़की हूँ. कभी-कभी लगता है कि अपने अतीत का हर वह हिस्सा जला दूँ जहाँ मैं लड़के के रूप में जानी जाती हूँ और कहीं ऐसी जगह चली जाऊँ जहाँ किसी को यह न पता हो कि मेरा जन्म लड़के के रूप में हुआ था, जहाँ सब मुझे लड़की ही समझें। जब भी कोई मुझे मेरे पुराने लड़के वाले नाम से पुकारता है, तब-तब मेरे भीतर जैसे कुछ मर जाता है. क्यों मुझे लोग एक लड़की नहीं मान लेते? मैं 14 वर्ष की आयु से लड़की की तरह रह रही हूँ, मुझे 21 वर्ष हो गए सम्पूर्ण रूप से लड़की की तरह रहते हुए. मुझ पर तरस खाओ, दुनिया वालों, और मुझे लड़की ही समझो।

मैं पिछले पाँच साल से हार्मोन्स पर हूँ ताकि मेरे वक्षों में स्वाभाविक उभार आए और हाँ, ऐसा हुआ है. अब एक लड़की की भाँति ही मेरा वक्षस्थल स्वाभाविक है. यहाँ एक बात बता दूँ, इन हार्मोन्स का असर हम जैसों पर ही होता है. यदि कोई सामान्य लड़का सोचे कि वह भी हार्मोन्स लेकर अपना वक्षस्थल बढ़ा ले तो यह संभव नहीं है. इसके लिए उसे भीर से लड़की होना होगा। मुझे अपने वक्षस्थल पर गर्व है और मैं स्वयं में लड़कीपन महसूस करती हूँ तथा किसी पुरुष को देख कर मैं भी वैसा ही महसूस करती हूँ जैसा कोई अन्य लड़की। मैं पुरुष की ओर आकर्षित होती हूँ, मेरा पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बनाने को दिल करता है. मेरी इच्छा होती है कि कोई पुरुष मुझे चाहे, प्यार करे और वह सब कुछ मुझे दे जिसकी मैं भी हकदार हूँ, अन्य लड़कियों की तरह. 

स्त्री होने के अहसास ने मुझे यह अहसास भी कराया है कि इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे एक स्त्री प्राप्त न कर सके. यदि स्त्री के पास महत्वाकांक्षा है, आत्मविश्वास है, कुछ कर दिखाने का हौसला है तो वह ज़रूर अपने गंतव्य पर पहुँचेगी। एक स्त्री के हर प्रकार की परिस्थितियों एवं कठिनाइयों से समझौता करने की योग्यता होती है. मुझे गर्व है कि मैं एक स्त्री हूँ और कमज़ोर नहीं हूँ. यह दुनिया स्त्रियों के कारण सुन्दर है. स्त्री में ही शक्ति है, नव-रचना करने की.

वैज्ञानिक कहते हैं, Transgender का सम्बन्ध मस्तिष्क से है. यदि कोई बच्चा लड़के का शरीर लेकर पैदा होता है, उसके मस्तिष्क में होता है कि वह लड़की है. इसी तरह लड़की का शरीर लेकर पैदा होने वाले Transgender के मस्तिष्क में होता है कि वह लड़का है. There is no COMPLETE man or woman in this world . Every male has certain female attributes and every female has certain male attributes. They are called sexual characteristics. These characteristics can be adopted, developed through surroundings and environment, or it could be inert since birth. Not all birth defects can be identified at birth. जब तक बच्चा एक ख़ास उम्र तक बड़ा न हो जाए, यह पता नहीं लगाया जा सकता कि वह गूँगा-बहरा है, अंधा है या स्पैस्टिक है. इसी तरह आप बच्चे के एक ख़ास उम्र पर पहुँचने तक उसका जेंडर निश्चित नहीं कर सकते। जेंडर बच्चे की शारीरिक बनावट से निश्चित नहीं होता, बल्कि मानसिक बनावट से निश्चित होता है, ऐसा वैज्ञानिक कहते हैं. इसलिए जब मैं कह रही हूँ कि मैं लड़की हूँ तो मानना चाहिए कि मैं एक लड़की हूँ. कोई भी वास्तविक लड़का अपने को लड़की नहीं कहना चाहेगा।

Since past two years, I am having a man in my life....and i am having a living relation with him... not married legally...but by ritually.... yes...legal marriage is not yet allowed as gay marriage is still not passed by Law.

(क्रमशः। जल्दी ही इसका एक और अंश पोस्ट करूँगी।)

No comments:

Post a Comment