Sunday, 8 March 2015

Women's day special : 4

Women's day special : 4

यह महिला दिवस, 8th March, उन औरतों के नाम, जो औरत होने के बावजूद पूर्ण औरत होने के लिए तरस रही हैं. यह उन औरतों के दर्द की कहानी है, जो पुरुष-शरीर में कैद हैं, यानि Transgender हैं यानि जिन्हें आम भाषा में हिजड़ा कहते हैं. ऐसी ही एक औरत की डायरी के कुछ और पन्ने.

मैं जिस तरह से अपना जीवन बसर करना चाहती हूँ, क्या इसका निर्णय दूसरे लोग करेंगे? समाज के पास मेरे लिए केवल तीन विकल्प हैं, या तो मैं तालियाँ बजा कर लोगों को दुआएँ दूँ, या मैं घर-घर जाकर भीख माँगूँ, या मैं वेश्यावृत्ति करूँ। क्या मैं अन्य लोगों की तरह सम्मानजनक जीवन नहीं जी सकती? अपने लिए सम्भावनाएँ तलाश करती हुई? मैं केवल एक शरीर नहीं हूँ, केवल बाहरी रूप-रंग नहीं हूँ, मेरे भीतर बहुत कुछ ऐसा है जो बेशकीमती है. मेरे शरीर में, जिसे अधूरा कह दिया गया है, एक भरा-पूरा दिल है, जिसमे भावनाएँ हैं, कामनाएँ हैं, सपने हैं. मैं अन्य लोगों की तरह ही एक इंसान हूँ, मुझे किसी अन्य क्षेत्र से आया हुआ अजनबी न समझें। यह घटिया समाज अज्ञानी है जिसे हम जैसों के होने की हकीकत नहीं मालूम। क्या यह मेरे बस में था कि मैं कोमल, स्त्रियोचित भावनाओं के साथ एक पुरुष शरीर में जन्मी? मेरा शरीर क्यों उपहास का विषय है? जब-जब समाज मुझ पर हँसता है, मेरे भीतर कुछ मर जाता है. लेकिन मैं अपना मरापन किसी को दिखाती नहीं, उसे सौंदर्य-प्रसाधनों की परतों में छुपा लेती हूँ, क्योंकि मैं शर्मदार हूँ, बेशर्म समाज जैसी बेशर्म नहीं।

(जिसकी कहानी मैंने लिखी है, मैंने उससे पूछा, 'जब तुमने अपने वक्षस्थल को प्राकृतिक रूप देने के लिए इलाज करवाया, तो क्या सेक्स चेंज भी करवाया है?' वह बोली, 'सेक्स चेंज करवाने के लिए मैं विदेश गई थी लेकिन मुझे डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि मेरा शरीर उस तरह के ऑपरेशन को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा, शायद दो वर्ष मुझे बिस्तर पर ही रहना पड़े. मैं चूँकि एक नृत्य विद्यालय चलाती हूँ, इसलिए वहाँ की ज़िम्मेदारियों को देखते हुए मेरे लिए दो वर्ष बिस्तर से बँधे रहना संभव नहीं था, इसलिए सेक्स चेंज नहीं करवा सकी.' एक ठंडी आह भर कर वह आगे बोली, 'मणिका, This is the reason, why I am not a complete woman like you.' मैं उसके शब्दों में अपने सन्दर्भ में सचाई खोजती रही, क्या मैं complete woman हूँ? क्या कोई भी औरत complete woman है? या कोई भी पुरुष, कोई भी इंसान complete है? हम सब अधूरे हैं, किसी न किसी रूप में, कोई शरीर से, कोई मन से, कोई दिमाग से, कोई भाग्य से, कोई चरित्र से, कोई परिवार से, कोई अपने कार्य से, लेकिन जिस तरह से ये Transgender अपने अधूरेपन को लेकर दुखी एवं शर्मिन्दा हैं, क्या हम तथाकथित पूरे लोग कभी अपने अधूरेपन पर दुखी एवं शर्मिन्दा हुए हैं?)

प्रस्तुति : मणिका मोहिनी

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