Thursday, 23 April 2015

कविता रीमिक्स 1

कविता रीमिक्स 1

लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल
लाली देखन मैं गईं, मैं भी हो गई लाल.

किसी के रंग में क्या रँगे
गहराया इतना कि उतारे न उतरे
दुश्वारी यह
कि हमारा अपना रंग छुप गया।

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