Friday, 10 April 2015

याचना Kavita 230

याचना

मेरी आँखों की रोशनी कम होने लगे तो तू वह रोशनी बन
मेरे चलने में लड़खड़ाहट होने लगे तो तू मेरे हाथ की लाठी बन
मेरी श्रवण शक्ति क्षीण होने लगे तो तू बोलती हुई मुस्कान बन
मेरे जीने का उत्साह कम होने लगे तो तू रोचक कहानी बन.
मेरे पुत्र !
उम्र के साथ मन याचक हो उठा है
पहले तू मेरी शरण में था
अब मैं तेरी शरण में हूँ.


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