Saturday, 18 April 2015

Kishor Biyani

Kishor Biyani

पता नहीं क्यों लोग पैसे वालों से जलते हैं? पैसा कोई पेड़ पर नहीं उगता, मेहनत से कमाया जाता है. टाटा, बिरला, अम्बानी, अंसल, जितने भी अमीर हैं, अपनी बुद्धि और मेहनत के बल पर अमीर बने हैं. धीरूभाई अम्बानी को बपौती में दौलत नहीं मिली थी, उनके पिता मामूली अध्यापक थे, धीरूभाई ने अपनी मेहनत से बहुत कम समय में एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। ऐसे ही अंसल साम्राज्य खड़ा हुआ. रतन टाटा  मिसाल बन गए, जिनकी बातें कोटेशन्स के रूप में कही जाती हैं. एक नए हैं Future Group (Big Bazar) के किशोर बियानी, जिन्होंने एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लिया, जो मुंबई की छोटी दुकानों में कपड़ा सप्लाई करने का काम किया करते थे, अब Pantaloons, Big Bazaar, Food Bazaar, Home Town जैसे नामों के साथ रिटेल बिज़नेस को पुनर्परिभाषित करके हर प्रकार के व्यापार में अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पुस्तक IT HAPPENED IN INDIA में अपनी Rags to Riches की कहानी लिखी है तथा व्यवसाय करने के गुर भी बताए हैं. मैंने यह पुस्तक पढ़ी है, अपना काम यानि व्यवसाय करने वालों को प्रेरित करती है. इस पुस्तक में मुख्य बात यह है कि बुद्धि, परिश्रम, एवम कल्पनाशीलता से किसी भी काम में विजय हासिल की जा सकती है. सच में पैसों के पेड़ लगाए जा सकते हैं. और फिर, पैसे का लाभ केवल सम्बंधित व्यक्ति या उसका परिवार ही नहीं उठाता, उसके कारण अनेक बेरोज़गार लोगों को नौकरी मिलती है, अनेक घरेलु और छोटे-मोटे काम करने वाले लोग बेहतर जीवन जीते हैं, देश की अर्थ-व्यवस्था में सुधार आता है. बहुत से लोग अमीरों का पैसा मुफ्त में पाना चाहते हैं, इस तर्क पर कि उन्हें ग़रीबों का ख्याल रखना चाहिए। मैंने खुद ऐसे कामचोर कर्मचारी देखे हैं जो काम किए बिना मुफ्त का खाना चाहते हैं. खुद काम करेंगे नहीं, और अमीरों से जलेंगे। मैंने कई भिखारियों को, जो सिग्नल पर मिल जाते हैं, कहा है कि चलो, कार में बैठो, तुम्हें नौकरी देती हूँ, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ. भिखारियों की बात न भी करें तो भी मैंने अनेक ऐसे लोग देखे हैं, जिनके आगे काम करने के, मेहनत करने के विकल्प थे लेकिन उन्होंने नहीं की और अमीरों को कोसते रहे. तो जो गरीब हैं, उनकी गरीबी का कारण अमीर लोग नहीं, उनका अपना आलसीपन और निकम्मापन है. अमीर किसी को गरीब नहीं बनाते बल्कि गरीबों की गरीबी को कम करते हैं.


No comments:

Post a Comment