Thursday, 28 May 2015

प्रार्थना

प्रार्थना

मेरी एक फास्ट फ्रेंड हुआ करती थी. उसका और मेरा ऑफिस आसपास था. उसकी आर्थिक स्थिति बहुत बढ़िया थी. मुझे ज़रूरत पड़ने पर पैसे उधार दिया करती थी. मैं लंच नहीं ले जाती तो ज़िद करके अपना लंच मुझे खिलाती थी. मैं कई बार भगवान से यह दुआ माँगती थी कि उसे बहुत पैसा दो ताकि वह मुझे ज़रूरत पड़ने पर दे सके. एक दिन अचानक मुझे ख्याल आया था कि मैं भगवान से सीधे अपने लिए क्यों नहीं माँगती? तो मुझे लगता है कि कई बार हम सीधे अपने लिए भगवान से नहीं माँगते बल्कि वह जरिया मज़बूत करने की प्रार्थना करते हैं, जिस ज़रिये से हम सुखी होते हैं. जो लोग हमारा ख्याल रखते हैं, वे हमारी प्रार्थनाओं में होते हैं. इसका अर्थ तो यही हुआ कि अच्छे लोग अवश्य और हमेशा किसी न किसी की प्रार्थनाओं में होते होंगे?



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