Monday, 11 May 2015

Gazal 46

Gazal 46

तुमने मुझे इतना छुआ
क्या तुम्हें कुछ नहीं हुआ?

बुझते अंगार जलाने
क्यों आए थे तुम मर्दुआ?

जल बिन मछली की उपमा
बेबस प्यार की बद्दुआ।

तुमने झूठ ही कहा था
पर मुझे सच में ही हुआ।

अब इस होने का भी क्या?
जो भी हुआ सो बस हुआ।

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