Tuesday, 12 May 2015

क्या लिखूँ Kavita 233

क्या लिखूँ

मैं भूल गई हूँ कविता लिखना।

मेरे पास भाव भी हैं, अभाव भी
विलास भी है, संत्रास भी
संज्ञान भी है, अज्ञान भी
आशा भी है, निराशा भी
पुराने दर्द भी हैं, नए ज़ख्म भी
शब्दों के ढेर भी हैं, मौन के मर्म भी.

फिर क्यों रुक जाती हूँ?
आगे बढ़ नहीं पाती हूँ?

लिखने को क्या लिखूँ?
कैसे लिखूँ?
और क्यों लिखूँ?

भूल गई हूँ लिखना
जैसे कभी-कभी भूल जाती हूँ जीना।

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