Saturday, 30 May 2015

चट्टान Kavita 235

चट्टान

चट्टान होती हैं न-टूटने के लिए।
चट्टान बनती हैं न-बिगड़ने के लिए।

सर्दी, गर्मी, बरसात
कोई भी मौसम
किसी भी चट्टान का
कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

आओ आँधियों
मुझे हिलाने की कोशिश करो।
आओ समुन्दर
मुझे डुबाने की कोशिश करो।
आओ बाहुबली
मुझे अपने अंक में भरो।
आओ जुझारू
मुझे कीचड़ में लथपथ करो।

तुम किससे जूझ रहे हो द्रोही
चट्टान चट्टान होती है
वह किसी के हिलाए
टस से मस नहीं होती।

उस पर अपना नाम नहीं लिख पाओगे
उसे किसी रंग में नहीं रँग पाओगे
उसे कुछ समझो या न समझो
पत्थर समझोगे तो ठोकर खाओगे।

मैं जब चाहूँगी
इसमें पंख लगा दूँगी
और यह हवा में उड़ने लगेगी।
मैं जब चाहूँगी
इसे पानी में बहा दूँगी
और यह सरलता से तैरने लगेगी।
मैं जब चाहूँगी
इसे फूलों से सजा दूँगी
और यह महकने लगेगी।

इसे पहचान है भावना के हाथों की
यह प्यार की छुवन को पहचानती है
इसीलिए पत्थर की है तो क्या?
कभी किसी मूरत में ढल जाती है
और आशीर्वाद के फूल बरसाती है।

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