Friday, 29 May 2015

Mahmud Alam

Mahmud Alam

एक सज्जन हैं Mahmud Alam (महमूद आलम). इनका कल एक मेल आया, Added you on Google. (मुझे Google  पर add करना नहीं आता. सच कहूँ तो ईमेल करने और फेसबुक करने के सिवा मुझे कंप्यूटर पर कुछ भी नहीं आता. कुछ लोग Linkedin भेजते हैं. मैं सबको Trash में डाल देती हूँ. मुझसे सिर्फ फेसबुक पर मिलें, और कहीं नहीं।) महमूद आलम ने कल दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक मेरे ब्लॉग की 12 लम्बी रचनाएँ पढ़ कर बढ़िया और विस्तृत कमेंट दिए. उनके कमेंट मेरी ईमेल पर आए. मैंने 4 का उत्तर दिया, पता नहीं उन तक पहुँचा या नहीं, क्योंकि उसका कोई जवाब नहीं आया. मैं इनके धैर्य की दाद देती हूँ, जो 12 घंटे तक लगातार मेरी लेखनी को ही पढ़ते रहे. दोषरहित रोमन में इन्होने कमेंट लिखे। दिल से कह रही हूँ कि ब्लॉग पर ऐसे सहृदय पाठक मिल जाएँ तो कहीं किसी पत्रिका / पुस्तक में छपास की इच्छा ही नहीं, नेट पर ही सारी ख़ुशी मिल रही है.

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