Monday, 1 June 2015

राघवेन्द्र अवस्थी

राघवेन्द्र अवस्थी

फेसबुक पर  एक मित्र हैं, राघवेन्द्र अवस्थी। अपने लगभग 5000 मित्रों की मंडली में खासे लोकप्रिय हैं. उनका कहना है कि वे मेरा बहुत सम्मान करते हैं और मेरी किसी बात का बुरा नहीं मानते, न मानेंगे। तीन-चार साल से मित्र हैं, जिसमे से अपने बड़बोलेपन के कारण दो बार अनफ्रेंड हो चुके हैं, कुछ म्यूच्यूअल फ्रेंड्स की सिफारिश पर तीसरी बार मित्र बने हैं. शायद अब अनफ्रेंड न करना पड़े. ऐसों को भी निभा लो मणिका, ऐसों को भी निभा लो.

लगभग तीन साल पहले राघवेन्द्र ने अपने डॉगी के साथ अपनी एक फोटो डाली थी और बताया था कि उसका नाम बूज़ो है, तब मैंने उन्हें यह मैसेज किया था : जब आपने अपने डॉगी का नाम बूज़ो लिखा तो मेरा ध्यान इस बात की ओर गया कि मेरे एक परिचित के डॉग का नाम भी बूज़ो है, पत्नी का नाम अर्चना, तथा उनके नाम का पहला अक्षर र है. मेरा ऐसी बातों की तरफ ध्यान जाता है कि इतनी समानताएँ किन्हीं दो व्यक्तियों में हैं तो क्यों हैं? इसीलिए मैंने आपका Year of birth पूछा।' (वह आपसे 8 साल छोटा है। )

मुझे यह साम्य बहुत कमाल का लगा था, मेरे एक अंतरंग मित्र और राघवेन्द्र में. दोनों का नाम R र से शुरू होता है, दोनों की पत्नी का नाम अर्चना (उसकी पत्नी का देहांत हो चुका था, He was a widower), और दोनों के डॉगी का नाम बूज़ो।' इन दिनों जब मेरी पोस्ट पर किसी कारण से राघवेन्द्र एक 'हल्ला बोल' खेल में शामिल हुए तो कुछ और साम्य देखने में आए, कि राघवेन्द्र मेरे मित्र की ही तरह बेहद बातूनी, हाजिरजवाब, कविताओं पर तुरन्त अपनी कविता लिखना, अपने को बहुत चतुर समझना, हर समय कन्याओं से घिरे रहने का शौक, यह अहंकार कि मैं इतना बढ़िया हूँ कि हर कोई मुझे पसंद करेगा ही करेगा (करेगी ही करेगी), कुछ-कुछ पागल सा, दीवाना सा, पर साफ़ दिल, भोला बच्चा जैसे, जो हर वक़्त यह विश्वास दिलाए कि हमसे ज़्यादा बड़ा उसका कोई अपना नहीं, शुभचिंतक नहीं, जो रोज़ गलती करे, जिसकी हर गलती पर माफ़ करने को दिल चाहे।

पर आखिर कोई कब तक माफ़ करे? मैंने अपने अंतरंग मित्र से मुक्ति पाई, जो मेरे लिए बहुत कठिन काम था, पर करना पड़ा. रिश्ते तोडना आसान नहीं, दिल टूटते हैं. लेकिन इन दिनों अनेक बार इस बात पर हैरान हुई कि भगवान ने एक जैसे दो रॉटन पीस Rotten Piece कैसे बनाए? और क्यों बनाए? सॉरी राघव। आय'म वेरी सॉरी।


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