Sunday, 26 July 2015

मस्ती में Kavita 238

मस्ती में

बहुत व्यस्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

भीतर से त्रस्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

अँधेरों की अभ्यस्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

आलसपरस्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

दुविधाग्रस्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

जीने को अभिशप्त हूँ
फिर भी मस्त हूँ.

किसने कहा, पस्त हूँ?
मैं तो मस्त हूँ.

Monday, 13 July 2015

Harnaam Kaur : Facial Hair

Harnaam Kaur : Facial Hair

This is 24 year old Harnaam Kaur, an Indian-origin British girl,  with moustache and full fledged beard, posing for a Bridal shoot for a British magazine. हरनाम कौर हार्मोन्स की बीमारी से ग्रस्त है जिसके कारण उसकी 16 वर्ष की उम्र में उसके चेहरे पर लड़कों की तरह मूछें और दाढ़ी उग आई. वह सप्ताह में दो-तीन बार अपने चेहरे पर वैक्सिंग कराती थी लेकिन उसमें बाहर दर्द होने के कारण कभी-कभी शेव भी कर लेती थी. एक बार चेहरे के इन बालों के कारण उसे जीवन से इतनी निराशा हुई कि उसने आत्महत्या करने का फैसला तक कर लिया। लेकिन मरना इतना आसान है क्या? धीरे-धीरे हरनाम कौर में आत्मविश्वास बढ़ा और उसने अपने इस रूप-विकार को सकारात्मक तरीके से लेना शुरू किया।

उसने H T को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि "One day, I hit my lowest point in life due to suicidal thoughts and self-harming incidents, but I decided to become a happier person. I fought back against society definition of what woman should look like. We need to realize that each one of us is different. We are all imperfectly perfect. I wanted to show the society that we can all celebrate our individuality. I love my lady beard and I'll forever cherish it." (मैंने अपनी आत्मघाती मनस्थिति पर विजय पाई और खुश रहने का फैसला किया। मैंने समाज की इस धारणा को बदलना चाहा कि स्त्री को एक ख़ास तरह से सुन्दर दिखना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि हर व्यक्ति दूसरे से भिन्न है. हम अपनी अनगढ़ता में पूर्ण हैं. मैं समाज को यह दिखाना चाहती थी कि हम सब अपनी निजता का उत्सव मन सकते हैं.)

उस पर एक ब्रिटिश मैगज़ीन की नज़र पड़ी और उसने उसे Bridal shoot के लिए तैयार किया।

यह कुछ उसी तरह है जैसे हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण कई पुरुष-शरीर स्त्री-मन रखते हैं और स्त्री-शरीर पुरुष-मन. जिस भी हाल में पैदा हो, इंसान को जाना ही है क्योंकि जीवन में रास भी बहुत है और मरना इतना आसान भी नहीं। इंसान इस दुनिया में ज़िंदा रहने के लिए किस-किस तरह दिल को समझाता है. इस लड़की के जज़्बे को सलाम।



Sunday, 12 July 2015

तिरिया चरित्तर : कहानी ; शिवमूर्ति

तिरिया चरित्तर : कहानी : शिवमूर्ति

एक श्रेष्ठ लेकिन मेरे हिसाब से अधूरी कहानी

शिवमूर्ति प्रबुद्ध लेखक हैं, जिन्होंने स्त्री के उत्पीड़न को, उसके प्रति होने वाले अन्याय को महसूस करके लिखा। उन्होंने नब्बे के दशक में औरत की ज़बरदस्त वकालत करते हुए एक बहुत ही खूबसूरत कहानी लिखी : तिरिया चरित्तर। इसमें मुख्य पात्रा विमली के साथ व्यभिचार करने की मंशा लिए उसका श्वसुर जब अपने कुत्सित उद्देश्य में सफल नहीं होता तो वह समाज के सम्मुख उसे कलंकित घोषित कर देता है. विमली के सच्चरित्र होने पर भी दुश्चरित्र पुरुष-प्रधान समाज द्वारा उसे अंगारों से दाग दिया जाता है. लेखक ने इस कुशलता से विमली जैसे सामर्थ्यवान, सच्चरित्र, उसूलों के पक्के चरित्र को गढ़ा है कि वह पाठ को बहुत दूर तक अपने साथ बहाए चलने की क्षमता रखता है. लेकिन शिवमूर्ति भाय, आपने इस कहानी को अधूरा क्यों छोड़ दिया? विमली जैसे सबल पात्र की कहानी दाग दिए जाने पर समाप्त नहीं होती। सच पूछिए तो असली कहानी वहीँ से शुरू होती है. क्योंकि उसके अपने चरित्र की छुपी हुई सम्भावनाएँ दागे जाने के क्लाइमेक्स के बाद ही उभरेंगी। और तब जो हश्र होगा, उसका क्लाइमेक्स इस क्लाइमेक्स से भी बड़ा होगा। 


Wednesday, 8 July 2015

मैं उसकी दीवानी Kavita 237

मैं उसकी दीवानी

कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को.
नहीं नहीं 
वह मेरा दीवाना नहीं
मैं उसकी दीवानी,
नियति ने पगला कर लिखी
एक अजब कहानी.

रोज़ नई चीख
खामोशी में से उठती है
रोज़ नया राग
टूटे वाद्य से निकलता है
कहानी एक ही है
रोज़ नए अंदाज़ में लिखी जाती है.

कुछ कहानियों के
उपसंहार नहीं होते
वे चलती हैं
धारावाहिक
जन्म-दर-जन्म.