Sunday, 12 July 2015

तिरिया चरित्तर : कहानी ; शिवमूर्ति

तिरिया चरित्तर : कहानी : शिवमूर्ति

एक श्रेष्ठ लेकिन मेरे हिसाब से अधूरी कहानी

शिवमूर्ति प्रबुद्ध लेखक हैं, जिन्होंने स्त्री के उत्पीड़न को, उसके प्रति होने वाले अन्याय को महसूस करके लिखा। उन्होंने नब्बे के दशक में औरत की ज़बरदस्त वकालत करते हुए एक बहुत ही खूबसूरत कहानी लिखी : तिरिया चरित्तर। इसमें मुख्य पात्रा विमली के साथ व्यभिचार करने की मंशा लिए उसका श्वसुर जब अपने कुत्सित उद्देश्य में सफल नहीं होता तो वह समाज के सम्मुख उसे कलंकित घोषित कर देता है. विमली के सच्चरित्र होने पर भी दुश्चरित्र पुरुष-प्रधान समाज द्वारा उसे अंगारों से दाग दिया जाता है. लेखक ने इस कुशलता से विमली जैसे सामर्थ्यवान, सच्चरित्र, उसूलों के पक्के चरित्र को गढ़ा है कि वह पाठ को बहुत दूर तक अपने साथ बहाए चलने की क्षमता रखता है. लेकिन शिवमूर्ति भाय, आपने इस कहानी को अधूरा क्यों छोड़ दिया? विमली जैसे सबल पात्र की कहानी दाग दिए जाने पर समाप्त नहीं होती। सच पूछिए तो असली कहानी वहीँ से शुरू होती है. क्योंकि उसके अपने चरित्र की छुपी हुई सम्भावनाएँ दागे जाने के क्लाइमेक्स के बाद ही उभरेंगी। और तब जो हश्र होगा, उसका क्लाइमेक्स इस क्लाइमेक्स से भी बड़ा होगा। 


No comments:

Post a Comment