Wednesday, 8 July 2015

मैं उसकी दीवानी Kavita 237

मैं उसकी दीवानी

कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को.
नहीं नहीं 
वह मेरा दीवाना नहीं
मैं उसकी दीवानी,
नियति ने पगला कर लिखी
एक अजब कहानी.

रोज़ नई चीख
खामोशी में से उठती है
रोज़ नया राग
टूटे वाद्य से निकलता है
कहानी एक ही है
रोज़ नए अंदाज़ में लिखी जाती है.

कुछ कहानियों के
उपसंहार नहीं होते
वे चलती हैं
धारावाहिक
जन्म-दर-जन्म.


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