Saturday, 15 August 2015

मैं जैसी भी हूँ Kavita 239

मैं जैसी भी हूँ

मुझे गर्व है कि मैं वह हूँ जो मैं हूँ.
मुझे अपनी जड़ों पर नाज़ है.
मुझे नाज़ है अपने वह होने पर जो मैं हूँ.
मैं जैसी भी हूँ, बस वैसी ही रहूँ।
आज़ाद रहूँ पर अनुशासित रहूँ।
खुश रहूँ पर संयमित रहूँ।
नृत्य करते समय ध्यान रखूँ
कि आँगन टेढ़ा न हो.
उम्मीदों को बोते समय देख लूँ
कि बीज विषैला न हो.
मेरे दिल में एक हवाई जहाज है
जो हर समय उड़ता रहता है.
कोई गंतव्य चुनूँ
ताकि रोज़ उड़ूँ।
खतरों से खेलूँ तो बस खेलूँ।
मैं ऐसी ही हूँ, बस ऐसी ही रहूँ।

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