Monday, 7 September 2015

Aurangzeb Road is now Dr. A P J Abdul Kalam Road

Aurangzeb Road is now Dr. A P J Abdul Kalam Road


दिल्ली अब वह पहले जैसी दिल्ली नहीं रही, उससे बेहतर और आकार में बड़ी हो गई है. ज़मीन के नीचे पार्किंग स्थल, बाजार, मेट्रो-प्लेटफॉर्म के रूप में तीन-चार लेयर्स, ज़मीन के ऊपर फ्लाईओवर्स और मेट्रो-मार्ग के रूप में एक-दो लेयर्स। क्षेत्रफल उतना ही है और जनसंख्या बढ़ती जा रही है तो बढ़ती आबादी के हिसाब से जगह का तो इंतज़ाम करना ही हुआ. इतनी सारी नई जगहों के लिए नए नाम रखने होंगे और नए नामों का चुनाव करना होगा। ये नाम हमारे वर्तमान समय से जुड़े हो सकते हैं.
अभी दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी (रोड) का नाम औरंगज़ेब रोड से बदल कर हमारे पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर Dr. A P J Abdul kalam Road रखा गया है. आदरणीय अब्दुल कलाम जी के नाम पर रोड का नाम रखे जाने से किसे ख़ुशी नहीं होगी? प्रसिद्धि और लोकप्रियता के मामले में अब्दुल कलाम साहब का कोई सानी नहीं है.
वैसे मुग़ल बादशाह हमारे देश का स्वर्णिम इतिहास हैं. उनकी बनाई हुई इमारतें तथा उनके किसी भी अन्य योगदान को नकारा नहीं जा सकता। सारे ही मुग़ल बादशाह अपनी-अपनी जगह नेकनामी से जुड़े रहे, सिवाय औरंगज़ेब के. औरंगज़ेब, जिसने अपनी क्रूरता के झंडे गाड़े, मन्दिरों को तहस-नहस किया, हिन्दू और गुरू तेगबहादुर सहित सिखों का कत्लेआम किया, गैर-मुसलिम वर्ग पर जाज़िया (कर, टैक्स) लगाया, संगीत समेत हर प्रकार की कला का बहिष्कार किया, यहाँ तक कि अपने पिता शहंशाह को उनकी वृद्धावस्था में कारावास का दंड दिया और अपने भाई को मौत के घाट उतरा। औरंगज़ेब के कार्यकलापों को किसी का समर्थन नहीं मिल सकता। यह उसका अपना ही नकारवादी दमखम था कि नफरतों के बीच उसने अपना साम्राज्य खड़ा किया। हम औरंगज़ेब को इतिहास से तो खारिज नहीं कर सकते लेकिन उनके नाम को यादगार बनाने को समाप्त करने के इस कार्य की प्रशंसा ज़रूर कर सकते हैं.




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