Saturday, 2 January 2016

भावों का कोलाज : एक अधूरी कहानी

भावों का कोलाज : एक अधूरी कहानी

मेरी कहानी 'शब्दों के प्रवाह' और 'तेरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे' के कुछ संवाद / अंश, कुछ कविताओं के अंश, इधर-उधर से कुछ गीत उठा कर एक अलग तरह का कोलाज बनाया है. बस यूँ ही रोमैंटिक होते हुए....

हँस-हँस कर जीने का ज़माना याद आया
आँखों को फिर रोने का बहाना याद आया
आज फिर उसकी कहानी याद आई
आज फिर उसका फ़साना याद आया.

(इंटरनेट का बेताज बादशाह और नौसिखियानी थी.
वह जंगल का राजा था, मैं महलों की रानी थी.)

'सिन्डी, तुझे यह किसी ने बताया या नहीं?'
'क्या?'
'कि तू गज़ब है, गज़ब?'
'बताया ना।'
'किसने?'
'तुमने अभी बताया।'

वो खिलखिलाना तुम्हारा मुझे फिर याद आया
मेरे दिल पर पड़ा फिर से किसी ग़म का साया।
मैं गज़ब हूँ तो क्या, तुम भी थे गज़ब कम नहीं
किस तरह बिन बात की बातों में मुझे उलझाया।

'इस बार, लगता है, तुमसे मिलने के बाद मैं वापस नहीं लौट पाऊँगा.'

(पिया बसन्ती रे, काहे सताए, आजा.)

'क्यों? क्या मैं तुम्हारे पाँवों में बेड़ियाँ डाल दूँगी?'
'पाँवों में तो नहीं, मन में बेड़ियाँ ज़रूर डाल दोगी. मुझे लगता है क़ि तुम मेरे सारे निश्चय, सारे नियम, तप, सब भंग करने वाली हो. सच बताओ, कहीं मेरा अपहरण करने का तुम्हारा कोई इरादा तो नहीं?'
'शट अप. जस्ट शट अप.'

वो जाने के लिए आना भी कोई आना था?
कभी न लौटने वाले को फ़िज़ूल चाहना था
तप, नियम, निश्चय तुम्हारे सब दुरुस्त थे
कुछ नहीं, बस मेरा दिल टूटने का बहाना था.

'तुम कितने सुन्दर हो, तन से, मन से. तुम कहाँ, मैं कहाँ?'
'ओह, कितना मीठा गुनगुनाती हो तुम..... लिसेन माय प्रिंसेस, तुम देखने की चीज़ नहीं हो, महसूस करने की चीज़ हो......'
'यानि मैं चीज़ हूँ?'
'देखो, मुझे शब्दों के जाल में न उलझाओ, मेरी शब्द-विशेषज्ञा..... योर हार्ट इज सो ब्यूटीफुल, योर ब्रेन इज सो ब्यूटीफुल. मुझे आने दो वहाँ, मैं तुम्हारा 'तुम' होना भुला दूँगा।'

(आओगे जब तुम साजना, अँगना फूल खिलेंगे।
बरसेगा सावन झूम-झूम के, दो दिल ऐसे मिलेंगे।)

'तुमने सचमुच मुझे हिप्नोटाइज़ किया हुआ है. हर जगह, हर घडी सिर्फ तुम ही तुम. तुमसे अतिरिक्त तो मैं कुछ सोच ही नहीं पाती.'

(लाली मेरे लाल की, जित देखूँ तित लाल
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल.)

'अच्छा? तो मैं हर घडी, हर जगह कहाँ-कहाँ घूम रहा हूँ तुम्हारे साथ?..... ओ माय डांसिंग क्वीन, ऐसी बातें करके तुम यहाँ मेरा जीना दुश्वार कर दोगी...... अच्छा बताओ, अगर तुम मुझे हिप्नोटाइज़ करोगी तो क्या करोगी?'
'मैं......? मैं तुमसे कहूँगी कि अपनी आँखें बंद करो और मुझे देखो.'
'ओह सिन्ड्रेला, माय सिन्डी, यू आर सो ब्यूटीफुल...... माय आइज़ आर क्लोज्ड एंड आय'म सीइंग यू.'

(मेरा बैरागी मन डोल गया, देखी जो अदा तेरी मस्ताना।)

'देखो, तुम इस तरह के नामों से मुझे न बुलाया करो. मुझे शर्म आती है.'
'ओह हो, मेरी भारतीय कन्या.... '

कैसे बौराए-पगलाए से थे वे दिन.. शब्दों में कितनी ताकत होती है. शब्द किसी भी हथियार से ज्यादा घायल कर सकते हैं और किसी भी मरहम से ज्यादा दवा का काम कर सकते हैं. केवल शब्द, शब्द और सिर्फ शब्द. शब्दों में छुपे हैं केवल सपने, सपने और सिर्फ सपने...... 

'हमारा यह स्वनिर्मित संसार कितना अच्छा है. किसी बाहर वाले का दखल नहीं.'
'सच सिन्डी, यह स्वप्नलोक अद्भुद है. अपनी पसंद के चरित्रों का निर्माण करो, अपनी पसंद के रूपाकार गढ़ो और उनके साथ रहो.'
'हाँ, बाहर अपनी पसंद के लोग नहीं मिलते, अपनी पसंद के लोगों की रचना हम अपने स्वप्नलोक में करते हैं और उनके साथ पूरी ज़िन्दगी जीते हैं, पूरी शिद्दत के साथ. हम कभी साक्षात नहीं मिलेंगे, वरना हमारा यह स्वप्नलोक टूट जाएगा, बिखर जाएगा.'
'हाँ सिन्ड्रेला, हम केवल अपने सपनों की दुनिया में मिलेंगे, मिलते रहेंगे. यहाँ हमारा अपना शासन चलता है. किसी को हमारे प्यार के बारे में कुछ नहीं पता. हम एकदम सुरक्षित हैं.'

(कहाँ ले चले हो, बता दो मुसाफ़िर
सितारों से आगे, ये कैसा जहाँ है?
समझ में न आए, ये दुनिया कहाँ है?)

'देख लेना, जब मैं मरूँगी तो मेरी आँखें खुली रहेंगी। मन में प्यास अधूरी रह जाए तो मरते समय आँखें खुली रहती हैं.'
'न, न, मरने की बात न कर. तुझसे पहले मैं मरूँगा।'
'मैं तुमसे बड़ी हूँ तो मैं ही मरूँगी न तुमसे पहले?'
'नहीं सिन्डी, मैं तुझसे पहले मरूँगा और अगले जन्म में तुझसे पहले पैदा होऊँगा। इस तरह अगले जन्म में हम मिलेंगे सही उम्र में.'
'सच?'
'हाँ, सच. इस जन्म में तुझे पैदा होने की बहुत जल्दी थी ना. अब मरने की जल्दी मत करना. हमें-तुम्हें मिलना है, अगले जन्म में. और फिर हर जन्म में.'

(ओह माय यंगेस्ट लवर, मैं इंतज़ार करूँगी, इंतज़ार करूँगी, इंतज़ार करूँगी।।।।।)
(हाय राम ! यह मैं क्या कह गई? नहीं नहीं, तुम जियो हज़ारों साल...... )

एक अधूरी कहानी।



2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को नव वर्ष के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं|

    ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete