Friday, 12 February 2016

कृष्णा सोबती

कृष्णा सोबती

कृष्णा सोबती के नाम से कौन परिचित नहीं होगा? डार से बिछुड़ी, ज़िंदगीनामा, ए लड़की, मित्रो मरजानी, हम हशमत उपन्यासों से प्रसिद्ध, 1980 में अपने उपन्यास 'ज़िंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित, हिन्दी की यह सुप्रसिद्ध लेखिका आज नब्वे के दशक में चल रही हैं। इस 18 फ़रवरी को ये अपने जीवन के 91 वर्ष पूरे करेंगी। मेरी उन्हें अनत शुभकामनाएँ।

पिछले दिनों उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान साक्षात्कारकर्ता को बताया कि एक बार उनसे किसी ने पूछा, 'शायद आपका एक प्रेम प्रसंग रहा था।' तो कृष्णा जी ने उत्तर दिया, 'मेरे हालात इतने भी खराब नहीं थे कि एक ही प्रेम प्रसंग होता।'

कृष्णा सोबती जी ने इससे पहले कभी अपने व्यक्तिगत जीवन की ओर कोई संकेत नहीं किया था। वे एक तरह से सिर से पैर तक लबादे में लिपटी एक रहस्यमय व्यक्तित्व की मालकिन रहीं, जिनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में शायद ही कोई जानता हो। तो जीवन के अंतिम पड़ाव में इतनी बड़ी बात कह देना, कि हालात इतने भी खराब नहीं थे कि एक ही प्रेम प्रसंग होता, मायने रखता है।

क्या जीवन के अंतिम पड़ाव में व्यक्ति अपने रहस्यों के बारे में बता कर किसी बोझ से मुक्त होना चाहता है? ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया की मानिन्द?

या

क्या यह सही है कि हर आदमी अपने प्रेम प्रसंगों के बारे में कम से कम किसी एक को बताने के लिए कुलबुलाता रहता है? क्या यह भी सही है कि जीवन में प्रेम प्रसंगों का घटित होना उस जीवन का सफल होना है, जिसे बता कर व्यक्ति अपने मुख्य होने को दर्शाना चाहता है? जिसके जीवन में कोई प्रेम न हुआ हो, क्या उसका जीवन नाकारा है? अपने जीवन में अनेक प्रेम प्रसंगों का होना क्या मनुष्य को अपने ऊपर गर्व करने का मौका देता है? सच है, जिसकी ओर किसी ने चाहत भरी नज़र से नहीं देखा, जिसकी ओर कभी कोई आकर्षित नहीं हुआ, जिसकी ज़रूरत किसी ने महसूस नहीं की, वह इंसान क्या? वह तो सिर्फ माँस का लोथड़ा है।

काश ! कृष्णा सोबती जी एक लेखक होने के नाते अपने अनुभवों को बेझिझक साझा करें। जिनके 'हालात खराब' नहीं होते, उन्हें ज़िन्दगी को खुल कर जीने का और नज़दीक से देखने का मौका मिलता है। लेखक इस नज़दीक से देखे हुए जीवन का लाभ अपने पाठकों को दे सकता है।


2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " भारत के 'ग्लेडस्टोन' - गोपाल कृष्ण गोखले - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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