Wednesday, 9 March 2016

मनु स्मृति में क्या है?

मनु स्मृति में क्या है?
मनु स्मृति सूर्य पुत्र प्रथम मनुष्य राजा मनु के बनाये हुए सिद्धान्त है। इसमें कुछ गलत नहीं लिखा है। मूल मनुस्मृति नष्ट हो चुकी है। नालंदा विश्विद्यालय को जब मुस्लिम आक्रमणकारियों ने जलाया था. तब उसकी लाइब्रेरी 6 महीने तक जली थी। उसके साथ भारत का गौरवमय इतिहास भी जल कर खाक हो गया।
मनु स्मृति में कुछ भी गलत नहीं लिखा है। मनु स्मृति में जाति नहीं, बल्कि वर्ण व्यवस्था का वर्णन है जो कर्म-आधारित है। मनु स्मृति में नारी को लेकर भी कुछ गलत नहीं लिखा है। मनु स्मृति के तीसरे अध्याय में लिखा है, "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता"।
मनु स्मृति के अनुसार अगर ब्राह्मण किसी की हत्या कर दे तो उसे फांसी दी जाये। क्षत्रिय किसी की ह्त्या करे तो उसे 40 वर्ष का कारावास। वैश्य हत्या करे तो उसे 20 वर्ष का कारावास। और शूद्र हत्या करे तो 7 वर्ष का कारावास। क्योंकि शूद्र में बुद्धि नहीं होती और ब्राह्मण अगर बुद्धिमान होकर भी ऐसा कुकर्म करे तो वह क्षम्य नहीं.
इस तरह मनु स्मृति ब्राह्मण विरोधी है.
मनु स्मृति के अनुसार मनुष्य कर्म से ही ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र है. इसके सैंकड़ो उदाहरण इतिहास में भरे पड़े हैं.
राजा विश्वसेन ने राजपाठ त्याग दिया और ब्राह्मण बनने हेतु तप किया और विश्वामित्र के नाम से विख्यात हुए.
राजा हरिश्चंद्र क्षत्रिय थे। इनका जन्म राजा मनु के पुत्र इक्ष्वाकु के कुल में हुआ था। मगर राजा हरिश्चंद्र आजीवन चांडाल (शूद्र) कहलाये। क्योंकि सत्य बोलने के कारन इन्हें राजपाट छोड़ना पड़ा और शमशान में चांडाल का कार्य करना पड़ा, जो शूद्र कर्म है। इस तरह एक क्षत्रिय राजा शूद्र बन कर आजीवन शमशान में रहा।
इसी वर्ण व्यवस्था की बात करती है मनु स्मृति।
सत्यकाम शूद्र था मगर गौ सेवा से ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ और सत्यकाम ब्राह्मण कहलाये। वाल्मीकि शूद्र थे मगर तप किया और ब्राह्मण कहलाये।
ऐतरेय ब्राह्मण की माँ इतरा एक भंगी की बेटी थी। इतरा के पुत्र ऐतरेय हुए, जिन्हें ब्राह्मण स्वीकार किया गया। 108 उपनिषदों में एक उपनिषद "ऐतरेय ब्राह्मण उपनिषद" भी है, जो महात्मा ऐतरेय ने ही लिखा था।
Krishna Kumar Tripathi के सौजन्य से.
(इस पोस्ट में शूद्र शब्द का कई जगह प्रयोग हुआ है, जिससे कई लोगों को ऐतराज़ हो सकता है. यह सिर्फ पहचान बताने के लिए दिया गया मात्र एक शब्द है. वर्ण व्यवस्था द्वारा निश्चित की गई जातियों का नाम भर है. क्यों लोग ब्राह्मण शब्द को अच्छा समझते हैं और शूद्र शब्द को बुरा?)

4 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " आधुनिक भारत के चींटी और टिड्डा - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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