Thursday, 24 March 2016

यह किस्सा भी खूब रहा

यह किस्सा भी खूब रहा

जी, बाई गॉड की कसम. यह किस्सा भी खूब रहा. उसने मुझे FR भेजी। वैसे तो मैं दो-तीन म्यूच्यूअल फ्रेंड्स देख कर स्वीकार नहीं करती लेकिन उसका हाई क्लास स्टेटस देख कर स्वीकार कर ली. शुरू में मैं कभी उसकी पोस्ट पर नहीं गई. मुझे ध्यान भी नहीं, होगा कोई. अचानक मैंने महसूस किया कि वह मेरी हर पोस्ट को Like तो करता ही है, कभी-कभी हल्का-फुल्का कमेंट भी करता है. और तो और, मैं जिस मित्र की पोस्ट पर जाती हूँ, वह उसका मित्र न होने पर भी Public पोस्ट के कारण वहाँ भी मेरे कमेंट के बाद हल्का-फुल्का कमेंट करता है. कोई बात नहीं। मैंने भी उसकी पोस्ट पर Like-Comment करना शुरू किया। एक बार उसने मेरी वह पोस्ट शेयर की, जिसके नीचे मैंने लिखा था, Not to be shared. मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती जो मना करने के बावजूद मेरी पोस्ट शेयर करें। पर उसने कमेंट में लिखा, 'Madam, your post is too good, I could not resist sharing. Plz allow me.' मैंने जवाब दिया, 'Ok. Never mind.' And I allowed him, just because of his status. (मुझे वे मित्र क्षमा करें जो स्टेटस, हैसियत, औकात जैसे शब्दों पर भड़क उठते हैं. मैं खुल्लम-खुल्ला बोलती कि I am a status conscious person and HE WAS OF HIGH STATUS. एक बात और, मुझे वर्दी वाले बहुत आकर्षित करते हैं, डॉक्टर, वकील, पुलिस वाले, डिफ़ेंस वाले, यहाँ कि जेल की वर्दी वाले भी. वर्दी कोई भी हो, बस चपरासी और ड्राइवर की न हो. हाहाहा।) तो साहब, मैंने भी उसकी पोस्ट पर Like-Comment करना शुरू किया। मैंने उसकी पिछले दो-तीन साल की पोस्ट्स खंगाली, घोर रोमैंटिक पोस्ट्स थीं. शायद मेरी पोस्ट्स भी रोमैंटिक होती हैं, इसीलिए उसने मुझे मित्रता अनुरोध भेजा होगा। एक बात जो मुझे रोमांचित करती थी, वह यह कि उसके सैकड़ों, हज़ारों मित्रों में मैं उसकी एकमात्र महिला मित्र थी यानि I was his only 'GIRL FRIEND.' यहाँ की एक-दो लड़कियों ने मुझे बताया कि उन्होंने उसे FR भेजी पर उसने reject तो की ही, अपना वह option भी बंद कर दिया जिससे FR भेजी जा सके. GREAT.

एक दिन मैंने अपनी पुत्रवधु को सम्बोधित करके हास्य की एक पोस्ट डाली, जो यूँ थी : एक दिन बरखा की पुत्रवधु भी उससे यह कहेगी, Dear Mother-In-Law, dont teach me how to handle my children. I am living with one of yours who needs a lot of improvement. : लो जी गज़ब हो गया. उसने मेरी पोस्ट के कमेंट में ही लिख दिया, 'मैंने बहुत सहा है. माँ और पत्नी के बीच पिस कर रह गया हूँ. किसी से अपना दुःख शेयर करना चाहता हूँ पर कुछ कह नहीं पाता।' मैंने उसका कमेंट तुरंत हटाया. पर तुरंत भी कहाँ? एक घंटे बाद देखा, तब देखते ही हटाया। तो वह मुझसे कुछ कहना चाहता था. जो इस तरह के दुखी पति होते हैं, वे मुझे अपने बेटे लगने लगते हैं. मैं तड़प उठती हूँ कि हाय, कैसे उनका दुःख दूर हो? मेरा पुत्र और पुत्रवधु ही शायद एकमात्र खुश और सुखी कपल हैं, जिसके लिए मैं कभी-कभी पुत्रवधु को कह देती हूँ, 'तू तो बड़ी बेवकूफ़ है, ज़रा ध्यान तो दिया कर, तेरा पति किससे फेसबुक पर बात कर रहा है? किसे कार में लिफ्ट दे रहा है?' उसका बिंदास उत्तर होता है, 'छोडो मम्मी.' सच है, स्पेस देने से ही रिश्ते अच्छे से निभते हैं.

तो मैं आपको बता रही थी कि पत्नियों के सताए लड़के मुझे अपने बेटे लगते हैं और मैं उनके लिए बहुत दुखी होती हूँ. लडकियाँ मुझसे इस बात पर नाराज़ हो सकती हैं पर मैं स्पष्ट कर दूँ कि पतियों की सताई लड़कियाँ मुझे अपनी बेटी नहीं लगतीं बल्कि मुझे उन पर क्रोध आता है कि मूर्ख, निकलती क्यों नहीं गन्दगी से? क्यों सड़ रही हैं नरक में? मैं किसी पोस्ट में यह पहले लिख चुकी हूँ कि जल्लाद पतियों के चंगुल से निकलना आसान है, जल्लाद पत्नियों के चंगुल से निकलना आसान नहीं. मुझे अब किसी के लिए दुखी नहीं होना, क्योंकि मैं किसी का दुःख दूर नहीं कर सकती। मुझे अपने इस पुत्र-सम मित्र को अमित्र करना पड़ा. पर होली की दुआएँ तो उसे दे ही दूँ. शायद होली का कोई रंग उसके रिश्तों में रंग भर दे.

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