Tuesday, 12 April 2016

लागा चुनरी में दाग़ : 14 हाय, इतनी छोटी लड़की

लागा चुनरी में दाग़ : 14

हाय, इतनी छोटी लड़की
न उम्र की सीमा हो, न जन्मों का हो बंधन

पचास साल की उम्र होने तक आप आराम से उम्र के दस साल छुपा सकते हैं. यानि पचास के होंगे तो चालीस के लगेंगे, चालीस के होंगे तो तीस के लगेंगे, तीस के हैं तो बीस के लग सकते हैं. जहाँ आपने साठ क्रॉस किया, आप और दस साल बड़े लगने लगते हैं. यानि साठ-पैंसठ के हैं तो सत्तर-पिचहत्तर के लगेंगे. And so on. दूसरी ओर जब आप बीस के होते हैं तो आपको तीस-चालीस साल के लोग भी बुड्ढे लगते हैं, जबकि आप साठ-सत्तर का होने पर भी खुद को बूढ़ा महसूस नहीं करते. वैसे एक उम्र पर आदमी बुड्ढा हो ही जाता है, सबके साथ है, हाँ, उस उम्र में भी यदि वह किसी युवा लड़की को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से संतुष्ट करने में सक्षम है, तो वह कहाँ से बुड्ढा है? इसी प्रकार यदि एक साठ साल की स्त्री को देख कर चालीस साल के पुरुष के मन में प्रेमिल भाव जागृत हो जाएँ तो यह उस स्त्री के लिए गर्व करने की बात हुई. ना.

लेखकों, कलाकारों पर उनसे बहुत छोटी उम्र की लड़कियाँ आकर्षित होती रही हैं. लेखक सलमान रुश्दी के साथ कमउम्र लड़कियों ने स्वयं आगे बढ़ कर शादी की. चित्रकार पिकासो के साथ उनकी 61 वर्ष की आयु में एक 21 वर्ष की नवयुवती ने उनसे प्रेम विवाह किया। इंग्लिश मैगज़ीन Playboy के मालिक, जिनकी उम्र 80 वर्ष के लगभग थी, के साथ एक बहुत छोटी उम्र की लड़की शादी करने के लिए तत्पर थी. सितार वादक श्री रविशंकर की पत्नी उनसे आधी उम्र की थी.

इमरोज़ ने जब अमृता प्रीतम के साथ रहना शुरू किया, तब उसकी उम्र काफी कम थी. बाद में उसकी उम्र बढ़ा दी गई. उर्दू शायर अमीर कज़लबाश अपने से सात-आठ वर्ष बड़ी महिला के साथ रहता रहा. ऐसे पुरुष, जो बिना विवाह किए, उम्र में अपने से बड़ी और समृद्ध महिलाओं के साथ रहते हैं, वे उन महिलाओं के रखैल ही तो कहलाएँगे। वैसे उम्र का जितना अंतर, यानि 40 वर्ष तक का, बड़े पुरुष और छोटी लड़की के बीच देखा गया, उतना बड़ी महिला और छोटे लड़के के बीच नहीं देखा गया. 

युवा लड़के जब अपने से बहुत बड़ी उम्र की महिला के सामने प्रेम का इज़हार करते हैं तो क्या उनका प्रेम सच में प्रेम होता है? मैंने अपनी कहानी 'पिघलता हुआ तप' में एक संवाद लिखा था : चाची पड़ोसन को बता रही थी, 'दाढ़ी-मूंछ निकल आने के बाद कौन लड़का छोटा रहता है? बल्कि ये लड़के ही हम जैसियों को फँसाने की तलाश में रहते हैं, ताकि कुछ करना-धरना न पड़े, मुफ्त में बैठे रोटियाँ तोड़ें और ऐश करें.' कई रसलोलुप भी होते हैं.

बहुत बड़ी उम्र का पुरुष किसी भी कमउम्र लड़की से ज़बरदस्ती कुछ नहीं कर सकता। लड़की स्वयं अपनी ख़ुशी से उससे अपना उपभोग करवाए तो करवाए. इन कतिपय सुप्रसिद्ध नामों के सिवा इस समाज में बहुत से ऐसे मामले देखने को मिल जाएँगे। कमउम्र, कमसिन, मृगनयनी कामिनियों के लिए ऐसे पुरुष ईज़ी टारगेट होते हैं. कुछ कमसिन लड़कियाँ उम्रदराज़ पुरुषों के प्रेम में पड़ जाती हैं, कारण कई हो सकते हैं, फादर फिगर के प्रति उनका आकर्षण, ऐसी मूर्ख कमज़ोर लडकियाँ जिनका दुनिया में कोई सहारा नहीं होता, उम्रदराज़ पुरुष के पैसे और रुतबे के प्रति आकर्षण, लड़कियों का आर्थिक रूप से ज़रूरतमंद होना, पुरुष की हैसियत और रुतबे के सहारे खुद ऊपर उठना, कुछ यह भी कि जल्दी मर जाएगा और हमें सब कुछ मिल जाएगा, लड़कियों की आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा जो उनके हमउम्र संघर्षरत लड़के पूरी नहीं कर सकते, आदि कई कारण होते हैं जो लड़कियों को बड़ी उम्र के पुरुष की ओर आकर्षित करते हैं. सोचने वाली बात है कि आज तक किसी कमसिन लड़की ने किसी ज़रूरतमंद कंगाल बुड्ढे का हाथ नहीं थामा। सोचिए, सोचिए, इस सच के पीछे के सच के बारे में सोचिए कि आज तक किसी कमसिन लड़की ने किसी ज़रूरतमंद कंगाल बुड्ढे का हाथ क्यों नहीं थामा?

इस सन्दर्भ में मुझे याद आ रही है वह लड़की, जिसने अपने से पंद्रह साल बड़े एक सुप्रसिद्ध लेखक कहानीकार / नाटककार से विवाह किया था. शायद वह लेखक ही उससे विवाह करना चाहता था. उसके प्रभाव से लड़की ने भी एकाध कहानी लिखी लेकिन भीतर इतनी प्रतिभा नहीं थी कि लेखन के क्षेत्र में अपनी जगह बना पाती. कुछ वर्षों के बाद लेखक की मृत्यु हो गई. हाय, हाय, इतनी छोटी लड़की विधवा हो गई..... समस्त लेखक समुदाय उस लड़की की मदद के लिए सामने आ गया और लेखक की रॉयल्टी के पाँच लाख रुपये लड़की को दिलवाए. बात तीस-पैंतीस साल पुरानी है, उस समय पाँच लाख रुपयों की क्या तो कीमत थी? वाह. किसी ने यह न सोचा कि उस लेखक की पहली या दूसरी, अन्य पत्नियां भी बैठी हैं, उनसे शायद बच्चे भी हैं, उनका भी कुछ हक बनता है, पर नहीं, हाय, हाय, यह छोटी सी लड़की..... और इस छोटी सी लड़की ने एक बरस तो दूर, छह महीने भी सोग नहीं मनाया और दूसरी शादी कर ली. यह भी खूब रही, पति के मरने पर पाँच लाख का लाभ तुरंत मिला और दूसरी शादी के लिए रास्ता भी खुल गया. लेकि उसने इस बार फिर गलती की. पहले अपने से पंद्रह वर्ष बड़े लेखक से शादी की थी, इस बार अपने से पंद्रह वर्ष छोटे लड़के से शादी की. ज़ाहिर है, यह शादी नहीं चली.

यह लड़की बुजुर्ग महिला में तब्दील हो जाने के बाद मुझे मिली, अपनी दूसरी शादी के किस्से सुनाए (पहली के तो मुझे पता ही थे), लेकिन मेरी सहानुभूति हासिल नहीं कर सकी. एकाध कहानी लिखने के बाद लेखिका होने का दम भरने लगी थी, पहले लेखक पति के कनेक्शन का श्रेय लेती थी. मुझे सखी कहती थी लेकिन मेरी हमदर्दी उसके साथ नहीं हो पाई. मैं मर मिटने वाले रिश्तों में विश्वास करती हूँ. जानती हूँ, रिश्तों की आँच ख़त्म भी होती है पर उसके लिए वांछित समय तो दो.

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