Tuesday, 12 April 2016

भाषा का सरलीकरण

भाषा का सरलीकरण
आजकल भाषा का सरलीकरण हो रहा है. यूँ यह सच है कि समय के साथ-साथ भाषा बदलती रहती है. इस बदलाव का कारण भाषा की शब्द-सम्पदा में वृद्धि तो है ही, इसके व्याकरण में भी परिवर्तन के लक्षण मिलते हैं. उदाहरण के तौर पर निम्नलिखित प्रयोग देखें.....

1. आजकल आप देखेंगे कि अँ और अं में कोई फर्क नहीं किया जाता जबकि दोनों की शब्द-ध्वनि में तो अंतर है ही, अर्थ में भी अंतर है. अँ में अनुस्वार की ध्वनि है, जबकि अं में हृस्व न की. 'वह हँस ( इसका अर्थ Laugh) रहा है' को 'वह हंस ( इसका अर्थ Swan) रहा है' लिखा जा रहा है, जैसे हँसी (Laughter) तो ख़त्म हो गई, सब हंस (Swan) होते जा रहे हैं. अँ का प्रयोग एकदम ख़त्म हो रहा है. जाएँगे को जाएंगे, जाऊँ को जाऊं, साँस को सांस. मैं इस गलत प्रयोग के प्रति सचेत हूँ इसलिए लगभग हमेशा इस मामले में गलती नहीं करती।

2. 'वह' का प्रयोग लगभग ख़त्म हो रहा है, 99% लोग इसे 'वो' लिखते हैं. 'वह' का बहुवचन 'वे' होता है, लेकिन उसे भी 'वो' लिखा जाता है. 'वो' उर्दू शब्द है, और एकवचन है. क्या सही न होगा कि हम 'वह' एवं 'वे' के लिए इसी शब्द का प्रयोग करें? अंग्रेजी में That की जगह Those तो नहीं कहेंगे ना?

3. 'यह' का प्रयोग भी समाप्तप्राय है इसके स्थान पर 'ये' का प्रयोग होता जबकि 'यह' एकवचन है और 'ये' बहुवचन। क्या आप अंग्रेजी में This की जगह These का प्रयोग करते हैं? नहीं ना? तो अपनी भाषा के साथ यह अन्याय क्यों?

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