Friday, 22 April 2016

एमिली ब्रौंटे का उपन्यास 'वुदरिंग हाइट्स'

एमिली ब्रौंटे का उपन्यास 'वुदरिंग हाइट्स'

एमिली ब्रौंटे ने अपना एकमात्र उपन्यास 'वुदरिंग हाइट्स' अपनी 27 वर्ष की आयु में 1845-1846 के बीच लिखा था, जो 1847 में प्रकाशित हुआ था तथा इसके एक साल बाद इस प्रतिभाशाली लेखिका की मात्र 30 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी. यह उपन्यास इस कदर रोचक एवं पठनीय है कि इसे एक बार पढ़ना शुरू कर देने पर पूरा पढ़े बिना नहीं रहा जा सकता. एक बड़े समीक्षक ने इसके बारे में यह भी कहा था कि इसे पढ़ लेने के बाद यह संभव ही नहीं है कि इस पर कुछ लिखा न जाए या अपने विचार व्यक्त न किए जाएँ. यह उपन्यास हमारे बी ए के पाठयक्रम में लगा था, जो मैंने तब और उसके बाद कई बार पढ़ा, अंग्रेजी अच्छी न आने के बावजूद. लगभग 170 वर्ष पूर्व लिखे गए इस उपन्यास की मानसिकता सार्वभौमिक और सर्वकालिक है. इसमें चित्रित पात्र आज भी हमें अपने आसपास मिल जाऐंगे। इस उपन्यास में प्रेम के ऐसे नाज़ुक पक्ष को उभारा गया है, जिससे भय तो लगता है, लेकिन जिसकी असलियत से इंकार नहीं किया जा सकता.

एमिली ब्रौंटे के उपन्यास 'वुदरिंग हाइट्स'.का नायक हीथक्लिफ अपनी प्रेमिका से बेइन्तहा प्रेम करता है, एकाधिकार की भावना रखता है। किसी कारणवश वह उसे मिल नहीं पाती यानि उससे छिन जाती है और उसकी ईमानदारी, वफ़ादारी के प्रति हीथक्लिफ संदेहशील हो उठता है तो वह पागलों की तरह उसका दुश्मन हो जाता है, उसके खून का प्यासा। यानि जिस मात्रा में वह उसे प्यार करता था, उसी मात्रा में उससे दुश्मनी की भावना रखता है। इस उपन्यास ने दिल पर ऐसी छाप छोड़ी थी कि जहाँ एक ओर हीथक्लिफ के प्रति मन कभी-कभी सहानुभूति से भर उठता था, वहीँ दूसरी ओर यह प्रश्न भी सालता रहता था कि जिस व्यक्ति को हम कभी जान देने की हद तक प्यार करते हैं, उसी के जानलेवा क्यों हो जाते हैं? यूँ यह भावना व्यक्ति-दर-व्यक्ति अपनी मात्रा में कम-ज्यादा हो सकती है लेकिन यदि प्यार सच्चा है तो प्रेमी के मन में उसे तोड़ने वाले, बेवफाई करने वाले के प्रति गुस्से की, बदले की भावना रहती ज़रूर है। क्यों इंसान उसी का दुश्मन हो जाता है, जिसे वो कभी हद से ज्यादा चाहता है? प्यार में यदि यह मारक तत्व निहित है तो प्यार सचमुच एक खतरनाक स्थिति है।


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