Wednesday, 18 May 2016

Get together

Get together

तीन या चार साल पहले की बात है. बॉबी ने अपने जन्मदिन पर अपने कार्यालय के सहकर्मी मित्रों को रात के खाने पर आमंत्रित किया. आमंत्रित मित्रों की लिस्ट बनाई, चालीस लोग थे. हमें मिला कर पैंतालीस हो गए. अक्सर ऐसा होता है कि जितने लोगों को बुलाओ, सारे नहीं आते, चाहे 'हाँ' कर दें. बेटा बोला, 'मैं 40 को बुला रहा हूँ, पर तुम 20 के ही खाने का इंतज़ाम करना.' यानि हमें मिला कर 25 के. मैंने कहा, 'कोई मना करेगा, तब देख लेंगे पर 40 को बुलाया है तो खाना 40 का ही बनना चाहिए.' उसने जोर देकर कहा, 'नहीं, मुझे अपने दोस्तों का पता है, सब नहीं आएँगे.'

मैंने 30 लोगों के खाने का इंतज़ाम किया. रात आठ बजे का समय दिया था. सात-साढ़े सात बजे से मित्र आने गए, 'यार, ऑफिस से घर कहाँ जाते, सीधे ही आ गए.'

'वेलकम वेलकम, नेवर माइंड.'

जब ड्रॉइंग रूम भरना शुरू हुआ तो मैंने लोग गिनने शुरू किए. मैंने बेटे से कहा, 'तुमने कहा था, 20 का इंतज़ाम करो. मैंने 30 का किया पर देख लो, तुम्हें सब कितना चाहते हैं, सारे आए हैं. पूरियाँ तो और बन जाएँगी पर सब्ज़ियाँ कम पड़ जाएँगी।'

'फ़िक्र मत करो, पीने के बाद किसी को इतना खाने का होश नहीं होता,' बेटे ने कहा.

रात बारह बजे खाना शुरू हुआ और जिसका डर था, वही हुआ. बर्तन पोंछ-पोंछ कर सब्ज़ियाँ निकाली गईं, पूरी के लिए आटा फिर गुंदा नमक डाल के, जितनी भी तरह के अचार रसोई में थे, सब परोसे गए. मैंने दोस्तों से माफ़ी माँगने के अंदाज़ में कहा, 'सारी गलती तुम्हारे इस दोस्त की है जो इसने हमें सही से अपडेट नहीं किया.'

'अरे आंटी, आप परेशान न हों, किसी को होश नहीं है कि वह क्या खा रहा है.'

जिन महिला मेहमानों ने नहीं पी थी, और जिन्होने पी थी, उन्होंने भी इतनी नहीं पी थी, उन्हें तो पता चल रहा है ना कि क्या खा रही हैं? मैंने सोचा.

बरखा बोली, 'कोई नहीं, हम आपको बाहर किसी बढ़िया जगह खाना खिला कर इसकी कमी पूरी कर देंगे.'

बॉबी बोला, 'कल मिल रहे हैं ना ऑफिस में, दोबारा ट्रीट मेरी तरफ से.'

'यार, हमें तो कुछ पता ही नहीं चल रहा, तुम क्या बोले जा रहे हो?'

दिल को समझाने की कितनी बातें कर लो, जो खेल बिगड़ना था, वह तो बिगड़ गया.

उस दिन जैसा हमारे घर हुआ, ऐसा किसी के घर न हो.


No comments:

Post a Comment