Wednesday, 18 May 2016

उम्र, तू रुक जा Kavita 254

उम्र, तू रुक जा

उम्र का एक साल और बढ़ गया
ज़िन्दगी का एक साल और घट गया।

अनुभव का एक साल और बढ़ गया
बिंदासी का एक साल और घट गया।

गाम्भीर्य का एक साल और बढ़ गया
चांचल्य का एक साल और घट गया।

सँभलने का एक साल और बढ़ गया
मचलने का एक साल और घट गया।

उम्र, तू रुक जा, वहीँ ठहर जा
मुझे इत्मिनान से जी लेने दे।
यूँ जीने जैसा जीना अब कहाँ रहा
आखिरी घूँट तसल्ली से पी लेने दे।

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