Friday, 3 June 2016

अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी बच्चन और रेखा

अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी बच्चन और रेखा

आज अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी बच्चन के विवाह की 43वीं  वर्ष-गाँठ है. ज़ाहिर है कि अमिताभ के साथ जया के नाम से ज़्यादा रेखा का नाम जुड़ा। अमिताभ और रेखा के मध्य बाकायदा प्रेम था, गहरा प्रेम, जिसके दौरान जया ने बेहद मानसिक कष्ट भोगा। पुरुष प्रायः प्रेम प्रसंग तो चला लेते हैं लेकिन अपना पारिवारिक जीवन नहीं तोड़ते, कहानी सिर्फ इतनी है. रेखा बेचारी अब तक रोती है. चाहे रेखा और अमिताभ ने अलग-अलग कितने भी प्रेम किए हों, (by virtue of being in film line), रेखा का गहन और आत्मीय प्रेम अमिताभ से था, जिसे अमिताभ के घटिया पुरुषवाद ने पब्लिक में कभी स्वीकार नहीं किया। अमिताभ बच्चन का नाम परवीन बॉबी ने भी अपने पागलपन में प्रेमी के रूप में लिया था लेकिन अमिताभ ने उसकी मानसिक रुग्णता में भी उसे सहारा नहीं दिया। महेश भट्ट इस मामले में अच्छे और सच्चे हैं जो निडर, बेधड़क अपने प्रेम-प्रसंगों के बारे में बताते हैं. हालाँकि लगातार प्रेम में पड़ते रहना फिल्म लाइन वालों की विवशता है लेकिन इस लाइन की लड़कियाँ कभी-कभी सच्चा प्रेम भी कर बैठती हैं. अब उम्र के अंतिम पड़ाव पर अमिताभ और जया के so called 'सफल' विवाह के नारे लगते हैं. इसीलिए तो मैं कहती हूँ कि पति-पत्नी के रिश्ते की यही खासियत है कि यदि टूटने की अनेक संभावनाओं के बाद भी नहीं टूटता तो उनके सारे अधिकार सुरक्षित रहते हैं. And for these reasons, I just do not like Amitabh Bachchan. Rekha is my favourite.

कला के क्षेत्र में आप बुलंदियों को छू लें लेकिन एक व्यक्ति के रूप में आप अपनी सचाई को नहीं स्वीकारते क्योंकि आप अपने प्रेम को गलत मानते हैं और मानते हैं कि आपकी सचाई दाग-धब्बों से भरी है, तो आप कहाँ के अच्छे इंसान हैं जो आपके पंखे आप पर डोले जा रहे हैं.

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