Friday, 10 June 2016

ट्रांसजेंडर यानि हिजड़े

ट्रांसजेंडर यानि हिजड़े

ये ट्रांसजेंडर यानि हिजड़े शिक्षा प्राप्त करना चाहें तो किन स्कूल-कॉलेजों में जाते होंगे? संग पढ़ने वाले इनका मज़ाक उड़ा कर ही इन्हें शिक्षा-स्थल से भागने को विवश कर देंगे. दिल्ली विश्वविद्यालय ने सन 2014 में स्नातकोत्तर कोर्स में तथा सन 2015 में स्नातक स्तर पर इन्हें प्रवेश देने का नियम बनाया और आवेदन फॉर्म में जेंडर के स्थान पर Other Category का कॉलम बनाया. इन्हें महिला कॉलेज में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. ये अन्य कॉलेज में प्रवेश पा सकते हैं. 2015 में 66 ट्रांसजेंडर छात्रों ने आवेदन पत्र दाखिल किया लेकिन उनमें से एक भी छात्र प्रवेश लेने के लिए आगे नहीं आया. इस वर्ष भी अभी तक केवल 9 छात्रों ने आवेदन पत्र भरा है लेकिन प्रवेश लेने की सम्भावना कम नज़र आ रही है. क्या इसका कारण यह है कि ये छात्र अन्य छात्रों की अपेक्षा कम नंबर लाए हैं या कुछ और? वस्तुतः दिल्ली विश्वविद्यालय ने आवेदन फॉर्म में Other Category का कॉलम तो बना दिया लेकिन ट्रांसजेंडर छात्रों को व्यवहारिक रूप से Comfortable (सहज) महसूस करवाने के लिए कोई प्रबंध नहीं किए. दिल्ली विश्वविद्यालय जैसा देश का पुराना और बड़ा विश्वविद्यालय इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्य न करे, यह शर्म की बात है. आखिर ये लोग शिक्षा प्राप्त करने कहाँ जाएँगे? क्या हमारा देश यह चाहता है कि ये लोग तालियाँ बजा कर ही अपना जीवन यापन करते रहें? क्यों नहीं ये शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ कर देश की उन्नति में योगदान करें?

नीचे दी गई दूसरी फोटो हिजड़ा लक्ष्मी की है, जो स्वयं को हिजड़ा कहने में शर्म महसूस नहीं करती. इसका पूरा नाम लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी है. Laxmi Narayan Tripathi is a transgender rights activist, Hindi film actress and Bharatanatyam dancer. She lives in Mumbai, She was born in December, 1978 in Thane. Laxmi is a hijra. She is the first transgender person to represent Asia Pacific in the UN in 2008. आखिर लक्ष्मी ने भी तो शिक्षा प्राप्त करके अपनी नियति को बदल डाला, तो फिर अन्य हिजड़ा उस ऊँचाई तक क्यों नहीं पहुँच सकतीं?

ये लोग भी देश की आबादी का हिस्सा हैं. यदि इनसे तालियाँ बजाना छुड़वा कर इन्हें अन्य क्षेत्रों में योग्य बनाया जाए और इनकी क्षमताओं का समुचित उपयोग किया जाए तो देश की उन्नति बहुमुखी होगी. सोचिए, कितनी मानव-सामर्थ्य का क्षरण हो रहा है?



5 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "११ जून का दिन और दो महान क्रांतिकारियों की याद " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. हार्दिक आभार.

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  2. लक्ष्मी एक शानदार शख्सियत हैं . उन पर लिखने के लिए बधाई आपको

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  3. लक्ष्मी एक शानदार शख्सियत हैं . उन पर लिखने के लिए बधाई आपको

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    1. धन्यवाद, इस लेख में लक्ष्मी का सिर्फ ज़िक्र है. उन पर मैं पहले भी लिख चुकी हूँ. पसंद करने के लिए पुनः धन्यवाद.

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