Sunday, 19 June 2016

किस्सा एक

किस्सा एक

(मुझे पिछले महीनों मे चार अंजान महिलाओं ने संपर्क किया, मेरे मैसेज बॉक्स मे, अपने प्रेमी / पति की बेवफाई के किससे बताने के लिए, यह हवाला देकर कि वे पुरुष मेरे बहुत गहरे मित्र हैं, यह उन्होंने फेसबुक पर कमेट्स से जाना है. किस्से मजेदार हैं, इसलिए मज़ा अाप भी लीजिए.)

फेसबुक पर एक युवक मेरा अच्छा मित्र है. 'अच्छा' इन अर्थों मे कि बहुत पहले कभी उसने मुझसे कुछ सलाह-मशवरा किया था. उसके बाद से वह मेरा बहुत अादर करने लगा. मैं भी उसे भोला बच्चा समझती हूँ. मैं फेसबुक पर उसकी पोस्ट मे उसके उत्तरोत्तर विकास को देख कर खुश हूँ. वह एक धीर-गम्भीर प्रकृति का युवक है, ज़रा भी छिछला, ओछा नहीं. बिना मिले भी यहाँ पोस्ट के माध्यम से मै इतना ज़रूर कह सकती हूँ कि वह एक शरीफ़ लड़का है, सत्चरित्र, छल-छद्म से कोसों दूर, कैरियर बनाने के लिए संघर्षरत, लेकिन मन मे बहुत अकेला है. ऐसे मे सच्चे साथी की चाह किसे नहीं होती?

हाल ही मे एक महिला मेरी मित्र बनी। उसने मित्र बनने के तीन महीने के भीतर ही मुझे मैसेज किया, 'मैडम, फेसबुक पर एक लड़का महिलाओं से दोस्ती कर उन्हें इमोशनली ब्लैकमेल करता है. अाप उस के बारे मे फेसबुक पर लिखिए.'

मैने उससे पूछा, 'अाप अपना पूरा अनुभव बताएँ कि किसने अापके साथ क्या किया। और मुझसे कैसा सहयोग चाहती हैं?'

'मै सिर्फ यह चाहती हूँ कि अाप इस लड़के को बेनकाब करें.'

'किसी को बेनकाब करना यानी बदनाम करना मेरे लेखन का उद्देश्य नहीं. मै अापको समस्या का हल बताने की कोशिश कर सकती हूँ, अाप मुझे पूरी बात विस्तार से बताएँ।' मैने कहा.

फिर उसने अपने बारे मे जो बताया, उसका सार यह.... वह एक सिंगल महिला है, फेसबुक पर इस लड़के से दोस्ती हुई, जो एक महीने की बातचीत मे प्रेम-प्यार की बातों तक पहुँच गई. फिर उसने लड़के का जो हुलिया और परिचय बताया, उससे मुझे अंदाज़ क्या, विश्वास हो गया कि हो, न हो, यह यही लड़का है, जो मेरा मित्र है. मैने महिला से पूछा, 'अापने कैसे मुझे इस योग्य समझा कि मुझे अपनी व्यक्तिगत बात बताएँ?'

'एक तो अाप इस लड़के को अच्छी तरह जानती हैं. दूसरे, अाप बहुत अच्छा लिखती हैं, बुराई को बिन्दास तरीके से उजागर करती हैं. मै चाहती हूँ, अाप ऐसे लड़कों का पर्दाफ़ाश करें.' उसके यह कहने से मुझे ऐसा लगा, जैसे उसका मकसद इस लड़के को बदनाम करना है.

असल मे सिंगल महिलाएँ (शायद सिंगल पुरुष भी) तरसी-भटकी होती हैं और मिलने वाले हर पुरुष मे उन्हें अपना स्वप्न-पुरुष नज़र अाता है. वे लड़कों पर बहुत जल्दी डुल जाती हैं, और मनचाहा न मिलने पर हिंसक हो उठती हैं, इस अाक्रोश के साथ कि लो, यह भी गया हाथ से.

मैने उस महिला का प्रोफाइल खोल कर देखा. वह उस मेरे मित्र लड़के से अाठ साल बड़ी थी. मैने महिला से पूछा, 'क्या वह लड़का अापसे उम्र मे कई साल छोटा है?'

'जी हाँ, पर उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैने बस दोस्ती करनी थी. उसकी बातें मुझे अच्छी लगती थी.'

'फिर टूटा कैसे? क्या उस  तोड़ा?'

'नहीं जी, देखिए, उसने अभी भी मुझे ये मैसेज भेजे हैं.' महिला ने लड़के के 4 मैसेज मुझे कॉपी-पेस्ट किए, जिसमे लड़के ने अनुरोध किया था कि मुझे छोड़ कर मत जाओ.

मैने कहा, 'इन मैसेज से लड़के की वफ़ादारी पता चलती है. इनसे लड़के का कोई भी बुरा रूप उभर कर सामने नही अाता. इनसे पता चलता है कि तुम्हारी ओर से दोस्ती खत्म की गई है?'

'यही समझ लीजिए. वह अन्य लड़कियों की पोस्ट लाइक करता था, मेरे मना करने के बावजूद लड़कियों की पोस्ट पर कर्मेंट करता था, वह बड़ा फ़्लर्ट था. इसलिए मैने अब उसे ब्लॉक कर दिया है.'

'क्या तुम कभी उससे मिलीं?'

'मिली तो नहीं, हाँ, कहीं जाते हुए उसके शहर से गुज़र रही थी, तब वह पाँच मिनट के लिए मिलने अाया था. अरे दीदी, उसकी पर्सनैलिटी तो कुछ भी नहीं है, एकदम साधारण है, फेसबुक पर बड़ा इम्प्रेसिव लगता था.'

ओह तो यह बात है. लड़का पसंद नहीं अाया.

फिर मैने उस महिला की इजाज़त लेकर उससे कुछ सवाल किए, मसलन, अाप सिंगल हैं तो नौकरी करती हैं या बिज़नेस? क्या अकेली रहती हैं? बच्चे हैं? अादि-अादि. उसने कहा, 'मेरा एक दोस्त है जो मेरा पैसे से पूरा ख्याल रखता है, मेरी हर ज़रूरत का.'

मुझे उसकी पूरी कहानी समझ अा चुकी थी. मैने उसे डाँटने के अंदाज़ मे लिखा, 'एक अादमी अापका पैसे से ख्याल रख रहा है, अगर उसे अापकी इस दोस्ती का पता चले तो क्या वह अापसे नाराज़ नहीं होगा? अाप खुद किसी के साथ हैं, और उस लड़के को अपना गुलाम बनाना चाहती हैं कि इसकी पोस्ट लाइक न करो, उसकी पोस्ट पर कमेंट न करो? अाप खुद बेवफ़ा हैं और उस लड़के की झूठी बेवफ़ाई का प्रचार कर रही हैं? क्यों? मुझे अापकी बातों से वह लड़का कतई वैसा नहीं लगा, जैसा अापने उसका चित्र खींचा है.'

उसकी अक्ल शायद थोड़ी ठिकाने अाई, बोली, 'दीदी, अाप सही कह रही हैं, वह गलत नहीं है, बस, हमारी नहीं बनी, किसी का कसूर नहीं था....'

'नहीं, तुम्हारा कसूर था, तुमने एक प्रेमी रखते हुए भी उस लड़के को बरगलाया, फिर उस पर ऐसे अधिकार जमाया जैसे वह तुम्हारा एकमात्र प्रेमी हो. तुम गलत हो, एकदम गलत. मै तुम्हें अनफ्रेंड कर रही हूँ. पर तुम्हारी पोस्ट पर नज़र रखूँगी कि तुम और किस-किस को दोस्ती की ग़लतफ़हमी दे रही हो.'

'नहीं दीदी, अब मै किसी से बात नहीं करूँगी। अपने सही कहा, गलत मै ही थी.'

अब उसका अकाउंट शायद डीऐक्टिवेटेड है. मैने अपने युवा मित्र से बस उसका नाम लिया कि उसने सारा किस्सा ज्यों का त्यों बयान कर दिया. मैने उसे संभल कर रहने की सलाह दी. और क्या कह सकती थी?



इति संपन्न किस्सा एक. 

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