Tuesday, 9 August 2016

कवयित्री शुभम श्री

कवयित्री शुभम श्री

एक कविता पर साहित्य जगत में हंगामा मचा है. कवयित्री शुभम श्री की कविता 'पोएट्री मैनेजमेंट' को इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार देने का निर्णय निर्णायक उदय प्रकाश के द्वारा लिया गया. चारों तरफ से जो विरोध के स्वर उठे तो उदय प्रकाश का स्पष्टीकरण वक्तव्य आया है जो नीचे प्रस्तुत है. कमाल यह है कि न युवा कवयित्री की कविता किसी को समझ (पसंद) आई, न निर्णायक का स्पष्टीकरण. मुझे भी नहीं. शायद आपको पसंद आए. कितनी बकवास कविता है, यह तो हम बाद में सोचेंगे, पर सवाल यह है कि यह कविता है भी या नहीं? पर पुरस्कृत है, इसलिए पढ़ लीजिए. 
पोएट्री मैनेजमेण्ट
कविता लिखना बोगस काम है ! अरे फ़ालतू है ! एकदम बेधन्धा का धन्धा ! पार्ट टाइम ! साला कुछ जुगाड़ लगता एमबीए-सेमबीए टाइप मज्जा आ जाता गुरु ! माने इधर कविता लिखी उधर सेंसेक्स गिरा कवि ढिमकाना जी ने लिखी पूँजीवाद विरोधी कविता सेंसेक्स लुढ़का चैनल पर चर्चा यह अमेरिकी साम्राज्यवाद के गिरने का नमूना है क्या अमेरिका कर पाएगा वेनेजुएला से प्रेरित हो रहे कवियों पर काबू? वित्त मन्त्री का बयान छोटे निवेशक भरोसा रखें आरबीआई फटाक रेपो रेट बढ़ा देगी मीडिया में हलचल समकालीन कविता पर संग्रह छप रहा है आपको क्या लगता है आम आदमी कैसे सामना करेगा इस संग्रह का ? अपने जवाब हमें एसएमएस करें अबे, सीपीओ (चीफ़ पोएट्री ऑफ़िसर) की तो शान पट्टी हो जाएगी ! हर प्रोग्राम में ऐड आएगा रिलायंस डिजिटल पोएट्री लाइफ़ बनाए पोएटिक टाटा कविता हर शब्द सिर्फ़ आपके लिए लोग ड्राइँग रूम में कविता टाँगेंगे अरे वाह बहुत शानदार है किसी साहित्य अकादमी वाले की लगती है नहीं जी, इम्पोर्टेड है असली तो करोड़ों डॉलर की थी हमने डुप्लीकेट ले ली बच्चे निबन्ध लिखेंगे मैं बड़ी होकर एमपीए करना चाहती हूँ एलआईसी पोएट्री इंश्योरेंस आपका सपना हमारा भी है डीयू पोएट्री ऑनर्स, आसमान पर कटऑफ़ पैट (पोएट्री एप्टीट्यूड टैस्ट) की परीक्षाओं में फिर लड़ियाँ अव्वल पैट आरक्षण में धाँधली के ख़िलाफ़ विद्यार्थियों ने फूँका वीसी का पुतला देश में आठ नए भारतीय काव्य संस्थानों पर मुहर तीन साल की उम्र में तीन हज़ार कविताएँ याद भारत का नन्हा अजूबा ईरान के रुख़ से चिन्तित अमेरिका फ़ारसी कविता की परम्परा से किया परास्त ये है ऑल इण्डिया रेडियो अब आप सुनें सीमा आनन्द से हिन्दी में समाचार नमस्कार आज प्रधानमन्त्री तीन दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय काव्य सम्मेलन के लिए रवाना हो गए इसमें देश के सभी कविता गुटों के प्रतिनिधि शामिल हैं विदेश मन्त्री ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी क़ीमत पर काव्य नीति नहीं बदलेगा भारत पाकिस्तान काव्य वार्ता आज फिर विफल हो गई पाकिस्तान का कहना है कि इक़बाल, मण्टो और फ़ैज़ से भारत अपना दावा वापस ले चीन ने आज फिर नए काव्यालंकारों का परीक्षण किया सूत्रों का कहना है कि यह अलंकार फिलहाल दुनिया के सबसे शक्तिशाली काव्य संकलन पैदा करेंगे भारत के प्रमुख काव्य निर्माता आशिक़ आवारा जी काआज तड़के निधन हो गया उनकी असमय मृत्यु पर राष्ट्रपति ने शोक ज़ाहिर किया है उत्तर प्रदेश में फिर दलित कवियों पर हमला उधर खेलों में भारत ने लगातार तीसरी बार कविता अंत्याक्षरी का स्वर्ण पदक जीत लिया है भारत ने सीधे सेटों में ‍‍६-५, ६-४, ७-२ से यह मैच जीता समाचार समाप्त हुए आ गया आज का हिन्दू, हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, प्रभात ख़बर युवाओं पर चढ़ा पोएट हेयरस्टाइल का बुखार कवियित्रियों से सीखें हृस्व दीर्घ के राज़ ३० वर्षीय एमपीए युवक के लिए घरेलू, कान्वेण्ट एजुकेटेड, संस्कारी वधू चाहिए २५ वर्षीय एमपीए गोरी, स्लिम, लम्बी कन्या के लिए योग्य वर सम्पर्क करें
गुरु मज़ा आ रहा है सुनाते रहो अपन तो हीरो हो जाएँगे जहाँ निकलेंगे वहीं ऑटोग्राफ़ जुल्म हो जाएगा गुरु चुप बे थर्ड डिविज़न एम० ए० एमपीए की फ़ीस कौन देगा? प्रूफ़ कर बैठ के ख़ाली पीली बकवास करता है !
अब निर्णायक का स्पष्टीकरण....
समकालीन युवा कविता का सबसे प्रतिष्ठित और बहुचर्चित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार इस बार युवा कवयित्री शुभमश्री, (जन्‍म 1991) की कविता 'पोएट्री मैनेजमेंट' को देने का निर्णय लिया गया है।

यह कविता नयी दिल्‍ली से प्रकाशित होने वली अनियतकालिक पत्रिका 'जलसा-4' में प्रकाशित हुई है।

बहुत कम उम्र और बहुत कम समय में शुभमश्री ने आज की कविता में अपनी बिल्‍कुल अलग पहचान बनाई है। कविता की चली आती प्रचलित भाषिक संरचनाओं, बनावटों, विन्‍यासों को ही किसी खेल की तरह उलटने-पलटने का निजी काम उन्‍होंने नहीं किया है बल्कि समाज, परिवार, राजनीति, अकादेमिकता आदि के बारे में बनी-बनाई रूढ़ और सर्वमान्‍य हो चुकी बौद्धिक अवधारणाओं के जंगल को अपनी बेलौस कविताओं की अचंभित कर देने वाली 'भाषा की भूल-भुलइया' में तहस-नहस कर डाला है। हमारे आज के समय में शुभमश्री एक असंदिग्‍ध प्रामाणिक विद्रोही (rebel) कवि हैं। सिर्फ पच्‍चीस वर्ष की आयु में इस दशक के पिछले कुछ वर्षों में उनके पास ऐसी अनगिनत कविताएं हैं, जिन्‍होंने राजनीति, मीडिया, संस्‍कृति में लगातार पुष्‍ट की जा रहीं तथा हमारी चेतना में संस्‍कारों की तरह बस चुकी धारणाओं, मान्‍यताओं, विचारों को किसी काग़ज़ी नीबू की तरह निचोड़ कर अनुत्‍तरित सवालों से भर देती हें। औश्र ऐसा वे कविता के भाषिक पाठ में प्रत्‍यक्ष दिखाई देने वाली किसी गंभीर बौद्धिक मुद्रा या भंगिमा के साथ नहीं करतीं, बल्कि वे इसे बच्‍चों के किसी सहज कौतुक भरे खेल के द्वारा इस तरह हासिल करती हैं कि हम हतप्रभ रह जाते हैं। इतना ही नहीं वे अब तक लिखी जा रही कविताओं के बारे में बनाये जाते मिथकों, धारणाओं और भांति-भांति के आलोचनात्‍मक प्रतिमानों द्वारा प्रतिष्ठित की जाती अवधारणाओं को भी इस तरह मासूम व्‍यंजनाओं, कूटोक्तियों से छिन्‍न-भिन्‍न कर देती हैं कि हमें आज के कई कवि और आलोचक जोकर या विदूषक लगने लगते हैं। उनकी एक कविता 'कविताएं चंद नंबरों की मोहताज हैं' की इन पंक्तियों के ज़रिए इसे समझा जा सकता है:

'भावुक होना शर्म की बात है आजकल और कविताओं को दिल से पढ़ना बेवकूफ़ी / शायद हमारा बचपना है या नादानी / कि साहित्‍य हमें जिंदगी लगता है और लिखे हुए शब्‍द सांस / कितना बड़ा मज़ाक है कि परीक्षाओं की तमाम औपचारिकताओं के बावजूद / हमें साहित्‍य साहित्‍य ही लगता है प्रश्‍नपत्र नहीं / खूबसूरती का हमारे आसपास बुना ये यूटोपिया टूटता भी तो नहीं... नागार्जुन-धूमिल-सर्वश्‍वर-रघुवीर सिर्फ आठ ंनबर के सवाल हैं।'

अपने भाषिक पाठ में बच्‍चों का खेल दिखाई देतीं शुभमश्री की कविताएं गहरी अंतर्दृष्टि और कलात्‍मक-मानवीय प्रतिबद्धता तथा निष्‍ठा से भरी मार्मिक डिस्‍टोपिया की बेचैन और प्रश्‍नाकुल कर देने वाली अप्रतिम कविताएं हैं।

शुभमश्री ने किसी कर्मकांड या रिचुअल की तरह रूढ़, खोखली, उकताहटों से भरी पिछले कुछ दशकों की हिंदी कविता के भविष्‍य के लिए नयी खिड़कियां ही नहीं खोली हैं बल्कि उसे जड़-मूल से बदल डाला है। जब कविता लिखना एक 'फालतू' का 'बोगस काम' या खाते-पीते चर्चित पेशेवरों के लिए 'पार्ट टाइम' का 'बेधंधे का धंधा' बन चुकीं थीं, शुभमश्री ने उसे फिर से अर्थसंपन्‍न कर दिया है।

उनकी कविताएं हमारे समय की विता के भूगोल में एक बहुप्रतीक्षित दुर्लभ आविष्‍कार की तरह अब हमेशा के लिए हैं।

उदय प्रकाश




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