Wednesday, 23 November 2016

Mental Block

Mental Block

इन दिनों दुखी हूँ। मेरे अपने दुःख तो ख़त्म हो गए, लोगों के दुःख मुझे पूरी-पूरी रात सोने नहीं देते। अब तक 'क्राइम पेट्रोल' और 'सावधान इंडिया' में देखा था। वो लड़कियां किस मिट्टी की बनी होती होंगी, जिनके साथ ऐसा होता होगा?

एक लड़की मेरी दुकान में नौकरी माँगने आई। उसके चेहरे पर पढ़े-लिखे होने का नूर था लेकिन बेहद उदासी भी थी। मातृ-पितृ विहीन। असहाय। मुस्कानरहित खाली आँखें। सहमी हुई सी। पगलाई हुई सी।

आज तक कोई चेहरा ऐसा नहीं निकला जिसे मैंने पढ़ा हो और मेरा पढ़ना गलत निकला हो। उसकी कहानी उसी दिन मेरे दिल और दिमाग़ में लिखी गई।

मैंने पूछा, 'बायोडाटा लाई हो?'

'नहीं, कल ले आऊँगी।'

'तुम्हारा नाम?'

'मुक्ता।' (नकली नाम)

'आगे?'

'आगे कुछ नहीं। बस इतना ही नाम है।'

मैंने कुछ समझा।

'मैं B Tech 4th year में हूँ, Electronics & Communications में। पर पढ़ाई छोड़ रही हूँ।'

'अरे, final year में क्यों छोड़ रही हो?'

'नहीं मैम, मैं पढ़ना नहीं चाहती। मुझसे पढ़ा ही नहीं जाता।मेरा कॉलेज उड़ीसा में है। मैं यहीं पास ही रहती हूँ, अपनी नानी और अंकल के साथ।'

'अंकल यानि मामा। तुम्हारे मामा क्या करते हैं?'

'नौकरी करते हैं पर मैं उन्हें मामा नहीं कहती, अंकल कहती हूँ।'

'अच्छा। उड़ीसा में तुम्हारे parents रहते हैं।'

'नहीं, मैं वहाँ हॉस्टल में रहती हूँ पर अब पढ़ाई छोड़ कर दिल्ली आ गई हूँ। And I am very much in need of a job. Can you help me?'

'कितनी salary expect करती हो?'

'No expectations, Ma'am, whatever, just whatever....'

'If I give you 5000/-?' मैंने यूँ ही बोल दिया।

'Its okay with me.'

उस लड़की की बेचारगी और चेहरे का सहमापन मुझे कुछ इस तरह द्रवित कर गया कि मैं मन ही मन कराह उठी। उसके वजूद में बहुत सारी कहानियाँ थीं जो मुझे विचलित कर गईं। I must do something for this girl.

संयोग से मेरा पुत्र भी उस समय मेरे साथ दुकान में बैठा था। उसने सारी बात सुनी और मुझे कुछ संकेत किया। मैं समझ गई, मुझसे कुछ कहना चाहता है। मैंने मुक्ता को दूर पड़ी कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। मैं और बॉबी अकेले हुए तो बॉबी बोला, 'आपने बहुत कम सैलरी बोल दी। इंजीनियर लड़की है, मॉम, कुछ तो ढंग की सैलरी दो।'

'बॉबी, इसके बिना कहे भी इसकी कहानी मुझे समझ आ रही है। मैं चाहती हूँ, यह लड़की अपनी पढ़ाई पूरी करे। इसके चेहरे पर भाव देखा? I just want to help her financially, emotionally, morally and what not.'

'I can understand your sentiments Mom, go ahead, do whatever you want. I am with you.'

(मेरे घर में यह बात अच्छी है (अन्य अनेक बातों के साथ), कि मेरे बच्चे मेरे किसी निर्णय में आपत्ति नहीं करते।)

मैंने उस लड़की को अगले दिन से काम पर आने के लिए कह दिया। साथ ही यह भी कहा कि 'तुम्हें 5 नहीं, ज़्यादा दूँगी।'

'No no, Ma'am, I am okay with 5. मुझे ज़्यादा क्या करने हैं?'

वह अगले दिन समय पर आ गई। जो समझाया, चुपचाप करने लगी। लंच टाइम में उसने अपना घर से लाया लंच खोला और दीवार की ओर मुँह करके बैठ गई। अरे, वह तो रो रही थी। उसके छुपाते-छुपाते भी मैंने उसके आँसू देख लिए। मैंने उसे गले से लगाया, कहा, 'मैं चाहती हूँ, तुम अपनी पढ़ाई पूरी करो। मैं तुम्हें पढ़ाऊंगी। मैं तुम्हें उड़ीसा भेजूँगी। ये सब बुरे दिन बीत जाएँगे।'

'आप तो मुझे जानती नहीं। आप क्यों मेरे लिए कुछ करेंगी?'

'किसने कहा, मैं तुम्हें नहीं जानती? मैं तुम्हें जानती हूँ, तुम बहुत प्यारी, भोली, बीस-बाइस साल की एक समझदार लड़की हो जो दूसरों के किए की सज़ा भोग रही हो। मैं तुम्हारा जीवन संवारूंगी। में तुम्हारी पढ़ाई पूरी करवाऊंगी। बोलो, कब जाना है उड़ीसा, अपने कॉलेज?'

'Thank you so much Ma'am, but I don't want to take any obligation. मुझे किसी का अहसान नहीं चाहिए। मुझे किसी के आसरे अब नहीं जीना। I want to build my own castle.'

'अहसान कैसा, मुक्ता, मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ। आज से तुम मुझे अपनी माँ समझो।'

'No Ma'am. मुझे पढ़ना ही नहीं है।'

कई बार अच्छा काम करना यानि पुण्य कमाना भी आपके हाथ में नहीं होता। आप किसी के लिए कुछ करना चाहें और वह ठुकरा दे, इससे दयनीय स्थिति और क्या हो सकती है। मैंने उसी दयनीय स्थिति में अपने को पाया और सोचा, मणिका, बड़ा महान बनने चली थी। उस छोटी सी लड़की ने तुझे कितना छोटा बना दिया।

'बस मैं यहाँ नौकरी करूँगी। आप मुझे छह हज़ार दे देना। कल आपके 'हाँ' करने के बाद मैंने तीन हज़ार का एक कमरा देखा है। मैं अकेले रहना चाहती हूँ।'

'अरे? पहले कुछ दिन नौकरी तो करके देख लो, निभती है या नहीं?'

'मुझे लगता है, यहाँ सब ठीक रहेगा। क्या मैं आपको 'आंटी' बुला सकती हूँ?'

'ज़रूर। अब शान्त होकर खाना खाओ और जो काम बताया है, वह करो।'

उसके पैदा होने के कुछ माह बाद उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी। उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। उसकी मासी ने उसे पाला। वह बहुत सालों तक मासी को माँ और मौसा को पापा समझती रही थी। नानी के बूढ़ा होने के कारण वह बाद में नानी और मामा के साथ रहने लगी।

मेरी दुकान में ड्राइवर समेत तीन लड़के काम करते हैं। हालाँकि मुझे ज़रूरत नहीं थी, फिर भी मैंने उस पर तरस खा कर उसे रख लिया था।

वह अगले दिन समय पर आई। लंच टाइम में जब मैं और वह अकेली थीं तो वह बोली, 'आंटी, बस मैं एक बात चाहती हूँ कि कोई मुझे हाथ नहीं लगाए। मुझे अच्छा नहीं लगता कि कोई मुझे छुए।'

'नहीं, नहीं, ये लड़के अच्छे हैं। वैसे भी ऐसे कोई किसी को नहीं छूता।'

'कल आपने मुझे छुआ था। मुझे किसी का भी छूना अच्छा नहीं लगता।'

'मैंने तुम्हें कब छुआ?' मुझ पर उसका यह इल्ज़ाम मुझे अजीब सा लगा।

'When you hugged me. जब आपने मुझे गले लगाया था।'

'ओह वह?' मैंने उसे Touch थेरेपी के फ़ायदे बताए (जो मैं कभी फेसबुक पर लिख चुकी हूँ) कि अपनों के स्पर्श से कैसे आदमी खुश रहता है।

'लेकिन आंटी, मैंने कई जगह से नौकरी इसीलिए छोड़ दी कि लोग मुझे छूते हैं। चाहे गलती से भी टच हो जाए, पर मैं सहन नहीं कर सकती।'

कुछ पल चुप रह कर मैंने फुसफुसाते स्वर में पूछा, 'तुम्हारे साथ किसी ने कभी कोई ज़बरदस्ती की क्या? कॉलेज में किसी लड़के ने?'

'मुझे नहीं मालूम। मुझे डर लगता है। मैं इसीलिए हॉस्टल नहीं जाना चाहती। मुझे हर जगह डर लगता है। इसीलिए मैं अकेले रहना चाहती हूँ।'

'तुम्हें किसी मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए।'

'मेरा इलाज चल रहा है। डॉक्टर मुझे नींद की गोली देते हैं। पर मुझे सोते हुए भी लगता है कि कोई मुझे छू रहा है। सब कहते हैं, मुझे वहम की बीमारी है।'

'तुम ठीक हो। नींद की गोली मत खाओ। तुम्हारी समस्या मनोवैज्ञानिक है, psychological है। मुझे अपने दिल का डर खुल कर बताओ। मैं तुम्हारा डर दूर करूँगी।'

'मैं कुछ नहीं बताऊँगी। तीन बार पुलिस बुला चुकी हूँ। उनसे कहा, मुझे किसी आश्रम में रखवा दो पर मेरी कोई नहीं सुनता। घरवाले कहते हैं, मुझे वहम है।'

'आश्रम में लड़कियां कौन सा सुरक्षित हैं। अच्छा यह बताओ, तुम मासी का घर छोड़ कर नानी मामा के पास क्यों आ गईं?'

'आप क्यों यह सब जानना चाहती हैं?'

'I feel for you, Mukta. I want to help you.'

'मेरी हेल्प इसी में है कि आप मेरी कहीं अच्छी नौकरी लगवा दें, तब तक मैं यहाँ काम करती रहूँ. I want to be independent.'

'यह दुनिया बड़ी खराब है। तुम बहुत छोटी हो। लगती और भी छोटी हो। मैं फ़िक्रमंद हूँ कि तुम्हारा क्या होगा?' मैंने कहा और फिर फुसफुसा कर पूछा, 'तुम्हारे मौसा ने तुम्हारे साथ कुछ किया क्या?'

'नहीं बताऊँगी।'

'तुम्हारे मामा ने तुम्हारे साथ कुछ किया क्या?'

'नहीं बताऊँगी।'

'बताने से तुम्हारे अंदर का डर निकलता पर कोई बात नहीं, मत बताओ,' कहते हुए मैंने फिर उसे गले से लगाना चाहा पर उसने मुझे यह कहते हुए झटक दिया, 'आंटी, आप मुझे फिर छू रही हैं।'

अगले दिन से वह नौकरी पर नहीं आई। यानि उसने नौकरी छोड़ दी। उसने बताया ही था कि जहाँ कोई उसे छुए, वहाँ वह नौकरी नहीं करती।

काश ! मेरे पास ऐसी सुविधा होती कि मैं ऐसी बेसहारा, शोषित लड़कियों को अपनी निगरानी में रख सकती। नेट पर ढूँढूँगी तो ऐसे NGO और नारी आश्रम का पता लगा लूँगी जो ऐसी लड़कियों को सुरक्षा दे सकें। मित्रों, आपको भी पता हो तो बताइए, नॉएडा के आसपास कोई ऐसी सुविधा।

(कहानी कितनी भी सच लगे, उसमें कल्पना का मिश्रण होता है।)