Thursday, 9 February 2017

तुम्हारे नाम ने Kavita 262

तुम्हारे नाम ने

तुम्हारे नाम ने मन में ऐसा अलख जगाया
कि तन-मन कीर्तन-कीर्तन हो उठा।
एक लम्हे को जो छू लिया
पूरा युग आँखों के आगे लहरा गया।
मन के द्वार पर बंदनवार फिर सज गए
तुमने आने के लिए तो नहीं कहा।
तुम्हारी दीवानगी का क्या कहना
रोज़ मुझे लिखते हो, रोज़ मिटाते होे।
मैंने कहा था ना, भूल नहीं पाओगे तुम
तुमने भी कहा था ऐसा ही कुछ।
लो, हम दोनों तो भूल गए
इधर मैं जी रही हूँ, उधर तुम।
तुम लिखोगे या मैं लिखूँ उपसंहार
कहानी ख़त्म हो तो पढ़ने का आनंद आए।

2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "युद्ध की शुरुआत - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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